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Editorial

स्वामी आत्मानंद जी का व्यक्तित्व तथा उनका समर्पण

इस लेख के माध्यम से मै भारत शासन से अनुरोध करता हू कि स्व. स्वामी आत्मानंद जी को मरणोपरांत पद्मविभूषण से सुशोभित करे । इनके योगदान को एक तरह से भूला दिया गया है । वही मुख्यमंत्री जी भी इस पर…

आर्टिकल 15 का दिल और उसकी पीठ के जख्म-कनक तिवारी

अपनी तमाम अच्छाइयों के बावजूद जातिवाद आज भी जहर है। वह भारतीय समाज की जड़ों को खोखला कर रहा है। एक धर्म में चार वर्ण होंगे। उन्हें अज्ञात लोगों ने लिखकर ईश्वर का वचन बना दिया होगा जिन्हें…

पुश्तैनी महल में ताजा हवा का झोंका-कनक तिवारी

महुआ ने अद्भुत संयम सावधानी और मुक्तिबोध के शब्दों की दृढ़.हनु की विनम्रता चेहरे पर कायम रखी। यह बताने के लिए कि विनम्रता मूल्यों को रचने में ज्यादा नायाब और स्थायी कारगर हथियार होती है।

“तुम तो मधु लिमये हो महुआ!” कनक तिवारी

महुआ मोइत्रा के भाषण में हिन्दुस्तान के अवाम की वेदना की कहानी शब्दों के साथ साथ उनकी आवाज के उतार चढ़ाव, चेहरे पर उग रहे तेवरों के झंझावातों के साथ हिलकोले खा रही थीं।

आर्टिकल 15 की फिल्मी नहीं, आईन-कथा

फिल्म आर्टिकल 15 में कई सवालों का जवाब नहीं दिया जा सकता था। आर्टिकल 15 अपनी बड़बोली भाषा के बावजूद धर्म, जाति, क्षेत्रीयता, भारतीयता, भाषा आदि के खांचों में फंसकर अभी तक कराहता रहा है।

सफेदपोश डॉक्टर बनाम झोलाछाप डॉक्टर

मध्यप्रदेश मे हालात तो पीएमटी के मामले मे बहुत ही गंभीर है । इस कांड ने करीब 44 गवाह की हत्या तक हो गई है । दुर्भाग्य से आज तक न हत्याकांड के तह तक पहुंचने की कोशिश की गई न पीएमटी के किसी…

दो नरेन्द्र! स्वामी विवेकानंद तथा नरेंद्र मोदी

सबसे पहले विवेकानंद ने भारतीय समझ में सबको शामिल करने का नायाब तर्क दिया। उनके अनुसार हिन्दुस्तान अकेला है जहां सबसे ज्यादा धर्मोें मसलन ईसाई, मुस्लिम, यहूदी, पारसी और तमाम छोटे बड़े…