www.positiveindia.net.in
Browsing Category

Entertainment

परदे का फाग… १, रङ्ग बरसे भीगे चुनर वाली…

Positive India: Sarvesh Kumar Tiwari: अमिताभ तब शिखर पर थे। शिखर पर थीं रेखा! और निर्देशन के क्षेत्र में उसी ऊंचाई पर थे यश चोपड़ा भी... सन इक्यासी में ये सब मिल कर लाये एक ऐसी कहानी, जो…

कामरेड समरेश बसु और फ़िल्मकार विमल रॉय का अमृत कुंभ !

अरे कुंभ नहीं पसंद है , कोई बात नहीं । गोली मारिए , कुंभ को । पर नाग बन कर , फ़न काढ़ कर , नित्य प्रति , क्षण -क्षण खड़े रहना इतना ज़रूरी है ?

छावा: चालीस दिनों तक तड़पाने के बाद शम्भू जी और कवि कलस के शरीर को टुकड़ों में काटा…

सिकन्दर से अब्दाली तक हर बार क्रूरता की नई परिभाषाएं देखी लोगों ने, छील दिए गए चमड़े के ऊपर नमक का लेप स्वीकार किया, रस्सियों में बंध कर पशुवत जीवन स्वीकार किया, पर स्वाभिमान त्यागना स्वीकार…

Chhava में छत्रपति शम्भाजी महाराज पर दर्शाए अत्याचार अतिरंजना नहीं, सच्चाई है।

जो योगेंद्र सलीम यादव ncert की बुक्स में लिखवाता है कि औरंगजेब टोपियां सिल कर गुजारा करता था, जो इरफ़ान हबीब बताता है कि वह तो दानी था, जो रोमिला आंटी आज भी मुगलों की याद में मल्टीपल ऑर्गेज़म…

90 साल की भरी-पूरी उम्र में सिनेमा का यह शलाका-पुरुष श्याम बेनेगल विदा हुआ है,उनकी…

श्याम बेनेगल के सिनेमा में हम समाज के विभिन्न स्तरों पर उपस्थित शक्ति-संरचनाओं को परस्पर संघर्ष में देखते हैं।

शत्रुघ्न सिन्हा और सोनाक्षी मुकेश खन्ना पर भड़के हुए हैं

सोना बेगम कह रही हैं कि यह उनके बाप के दिए हुए संस्कार ही हैं कि वे खन्ना साहब को गाली नहीं दे रहीं, वरना उन्हें वह भी आता है। वाह! क्या बात है।

पुष्पा जैसी सबसे अधिक कमाई करने वाली अधिकांश फिल्में हिंसा से भरी हुई है

यह धर्म का अनुशासन ही है कि ईरान से भाग कर आये सौ डेढ़ सौ पारसी न केवल हजार वर्ष से सुखमय जीवन जी रहे हैं, बल्कि टाटा के रूप में सबसे बड़े व्यवसायी और भाभा के रूप में सबसे बड़े वैज्ञानिक बन…

स्मिता पाटिल अपनी कई फ़िल्मों की अन्तिम फ्रेम में वे अकेली ही खड़ी नज़र आती हैं!

रुपहला सौंदर्य, गौर वर्ण और प्रचलित नैन-नक़्श स्मिता के पास नहीं, लेकिन एक सँवलाया हुआ-सा खिंचाव है, क़शिश है, लगभग आत्मघाती आकर्षण है।