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Editorial
मुख्यमंत्री रहते हुए डॉ रमन सिंह आयुर्वेद महाविद्यालय को विश्वविद्यालय में क्यों नहीं…
डा. रमन सिंह के समय संसाधन की कोई कमी नही थी । रायपुर मे महाविद्यालय की इतनी बड़ी जमीन , बिल्डिंग सब कुछ था । नही थी तो इच्छा शक्ति, जिसके कारण इस तरह आयुर्वेद के विकास के लिए कदम बढे ही…
मरते जन आंदोलन, मरते गांधी- कनक तिवारी की कलम से
भारतीय लोकतंत्र खेत है जिसे सरकारी बदइंतजामी की बाड़ खा रही है। खेत की उपजाऊ ताकत कभी खत्म नहीं होती। बाड़ वह कृत्रिम मेड़ है जिसे कभी न कभी जन सैलाब जरूर बहा देगा।
एक मुख्यमंत्री, दो बीएएमएस चिकित्सक कैबिनेट मंत्री – फिर भी आयुर्वेद…
हम लोग उस समय ज्यादा खुश हुए कि हमारे बीच का ही आदमी मुख्यमंत्री बना । कितना दुर्भाग्य था कि उन्ही के कार्यकाल मे बीएएमएस चिकित्सकको के यहां झोला छाप चिकित्सक के नाम से छापे भी पड़े । फिर…
केदारनाथ आस्था की कथा गाथा
इतने भयानक त्रासदी के बाद जहाँ कितने लोगों ने अपनी जान गवाँ दी , कई घर, दुकान-मकान टूट गए , बस्ती के बस्ती बह गए, पर वहीं 1000 साल पुराने केदारनाथ मंदिर को कुछ भी नही हुआ।
सरकारी आयुर्वेद महाविद्यालय की इतनी बदतर हालत क्यों?
आज भी पिछले दिनो समाचार पत्र की सुर्खियां बनीं कि यहाँ के छात्र यौन उत्पीड़न का शिकार हुए है । इससे समझा जा सकता है कि उस समय और आज के हालात मे कोई विशेष फर्क नही पड़ा है । वही शिक्षा की…
बस्तर वासियों! हम एक हैं:कनक तिवारी
छत्तीसगढ़ के निवासियों की उम्मीदें कांच के बर्तनों की तरह न केवल टूट गई हैं, बल्कि कांच के टुकड़े उन्हें गड़ रहे हैं।
छत्तीसगढ़ में तेजी से तथाकथित विकास हो रहा है। विकास वह ग्लेशियर है जिसका…
एलोपैथिक डॉक्टर आयुर्वेद के विकास में बाधक क्यों ?
एक आयुर्वेद स्नातक जिसकी सीमाऐ भी सीमित है, वो इन एलोपैथिक चिकित्सको के लिए कैसा खतरा बन गया, समझ से परे है.
दूरस्थ अंचलो मे जाना नही चाहते तो वहां के लोगो के चिकित्सा के मौलिक अधिकार से…
#WorldCup2019 में पाकिस्तान को धोना मजबूरी नहीं ज़रूरी था
वो कहते है ना बकरी कब तक ख़ैर मनाएँगी , बस ... फिर वही हुआ। भारत ने पाकिस्तान पर क़हर ढाते हुए *रन स्ट्राइक* कर दी और अपनी आदत के अनुसार पाकिसतान फिर हार गया। काँच रूपी जीत का सपना चट्टान के…
धन्वंतरि पुरस्कार की धज्जियां उड़ाता आयुर्वेद महाविद्यालय
धन्वंतरि सम्मान जिस दिन तत्कालीन मुख्यमंत्री ने घोषणा की, उसी दिन साफ हो गया था । ये पुरस्कार आहाते से बाहर नही जाने वाला था । पहले पुरस्कार के घोषणा के बाद से ही वरिष्ठता की तलवार खीच गई…
संत कबीर पर कनक तिवारी का विशेष लेख
कबीर से बेहतर सेक्युलरवाद की परिकल्पना संविधान में भी नहीं है। संविधान तो सेक्युलरवाद के नाम पर अलग अलग कोष्ठकों में धर्मगति को नियंत्रित करता है। कबीर मुफलिस थे अर्थात आत्मा के निद्र्वन्द्व…