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भारत में बैठकर बेंजामिन नेतन्याहू से प्रश्न?

विश्व भर के मुसलमान सबसे ज्यादा ध्रुवीकृत हो रहे हैं, लेकिन जो बच गए चाहे वे ज्यूस हों या हिंदू, कितने भी तटस्थ हों, आखिरकार अध्रुवीकृत हुए कैसे रह सकते हैं?

स्वच्छ भारत आंदोलन के स्वर्णिम दौर में हम कूड़ाप्रधान देश क्यों बन रहे हैं?

कुकुर भी जिस स्थान पर बैठता है, उसे पूँछ से बुहार देता है। फिर मनुज ही कूड़े का कुबेर क्यों बन बैठा है?

किशोर कुमार के जीवन का अंतिम दिन अत्यंत साधारण था!

उनकी हालत तेज़ी से बिगड़ी। आँखें मुंदने लगीं, दम फूलने लगा। दो साल पहले किशोर ऐसा ही एक मज़ाक करके लीना को डरा चुके थे। लीना सोचने लगीं कि क्या वे फिर से मज़ाक कर रहे हैं? लेकिन किशोर अपने…

आधुनिक इस्राइल का जन्म भारतीय सैनिकों की हैफ़ा विजय से ही हुआ है

Positive India:Rajkamal Goswami: प्रथम विश्व युद्ध से पहले समूचा मध्यपूर्व जिसमें ईराक़ सीरिया जॉर्डन लेबनान सब शामिल था तुर्की के उस्मानी ख़िलाफ़त का अंग था । वही ख़लाफ़त जिसकी सुरक्षा के…

गाजा पट्टी के नागरिकों से एक पैसे की सहानुभूति भी नहीं है

गाजा पट्टी के नागरिकों से एक पैसे की सहानुभूति भी नहीं है। इस लिए कि अगर वह सभ्य शहरी होते तो अपने आंगन में आतंकी हमास को फूलने-फलने नहीं देते। आतंक और आतंकी के किसी भी समर्थक से कभी भी किसी…

पशु-पक्षी कैसे मरते हैं और मरने के बाद उनका क्या होता है?

पक्षियों का भरपूर नींद नहीं लेना मुझे करुणा से भरता है। मछली आँखें खोलकर इसलिए सोती है, क्योंकि उसकी पलकें नहीं होतीं। साँप की भी नहीं होतीं। पक्षियों की आँख पर एक झीनी-सी झिल्ली ज़रूर होती…

मौन को कोलाहल निगल लेता है , साधना को संभोग

रशियन सुंदरी दारिया और भारतीय अधेड़ विनय के कामसूत्री मनोशारीरिक प्रयोगों से चित्रलेखा के कुमारगिरि की पाप पुण्य की विवेचना मन मे आती है ।फिर पृश्न उठता है कि ध्यान में साधना या काम और वासना?

गुरुकुल कॉलेज में रेमवॉक टेक्नोलॉजी पर कार्यशाला

पॉजिटिव इंडिया:रायपुर, गुरुकुल महिला महाविद्यालय में कंप्यूटर विज्ञान विभाग एवं रेमवॉक टेक्नोलॉजी के संयुक्त तत्वावधान मे वेब डिजाइन एंड डेवलपमेंट विषय पर। 6 दिवसीय कार्यशाला। 9…

सिनेमाई संसार में पराजित प्रेम कहानियों की सर्वश्रेष्ठ नायिका कौन? रेखा! रेखा और केवल…

प्रेम बूढ़ा नहीं होता कभी! रेखा कभी बूढ़ी नहीं होंगी। यूँ ही गुजर जाएंगी, कातिक की रात में रजनीगन्धा की गंध लिए निकले किसी झोंके की तरह... यही उनकी नियति है...