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राहुल गांधी और टोडरमल

दयानंद पांडेय

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Positive India: Dayanand Pandey:
भारतीय राजनीति की कश्मकश देखिए कि प्रधान मंत्री ने बतौर प्रधान मंत्री दो ऐसे लोगों को लगातार संरक्षण दिया है और मज़बूत किया जो कभी किसी के वफ़ादार नहीं रहे । इन की विश्वसनीयता सर्वदा संदिग्ध रही है । यह दोनों ही समय बदलते ही साथ छोड़ देते हैं । ठीक वैसे ही जैसे जहाज़ जब डूबने को होता है तो सब से पहले चूहे कूद पड़ते हैं ।

एक अफसरशाही , दूसरे दलित । अफसरशाही और दलितों को मज़बूत करने के चक्कर में मोदी ख़ुद बहुत कमज़ोर होते गए हैं । निरंतर कमज़ोर । कश्मीर में 370 ख़त्म करने , तीन तलाक को रौंद देने , अयोध्या में राम मंदिर , विदेश नीति, विकास , आर्थिक तरक्की और जनाधार का सारा करिश्मा यह दलित और अफ़सर मिल कर चाट गए हैं । भाजपा और मोदी का कोर वोटर इतना आहत है कि अब मोदी को देखना नहीं चाहता ।

लेकिन मोदी की क़िस्मत देखिए कि एक राहुल गांधी है जो अपनी अराजकता , अभद्रता और मूर्खता में नरेंद्र मोदी को मज़बूत करने में कोई कसर नहीं छोड़ता । अपनी श्रेष्ठता ग्रंथि का मारा राहुल गांधी , मोदी को फिर लोगों के सिर पर चढ़ा देता है । राहुल गांधी के चंपू मंत्रिमंडल को देख कर अकबर की याद आती है । बल्कि अकबर के बहाने बीरबल और टोडरमल की याद आती है ।

क़िस्सा थोड़ा अटपटा है , अभद्र है , पर राहुल जैसे विचित्र और ज़रूरत से ज़्यादा होशियार टाइप व्यक्ति के लिए यही क़िस्सा माकूल दिखता है ।

जैसा कि अमूमन होता है कि सहकर्मी या मंत्रिमंडल के सदस्यों में उठते बैठते कुछ अनौपचारिक संबंध बन जाते हैं । हँसी-मजाक शुरू हो जाता है । तो बीरबल और टोडरमल के बीच भी यही हुआ । तो एक बार टोडरमल ने बीरबल को लगभग चुनौती दे कर कहा कि बड़े बुद्धिमान बनते हो । हमारा एक काम करवा दो तो जानें । बीरबल ने बेधड़क कहा , बताओ l काम हो जाएगा । टोडरमल ने कहा कि रानी का दूध पीने का हमारा बहुत मन है । पिलवा दो ।

बीरबल ने कहा कि यह तो बहुत कठिन काम है । नहीं हो पाएगा । टोडरमल ने ताना दिया बीरबल को कि, बस सारी बुद्धि घास चर गई ? ऐसे ही बुद्धिमान बने इतराते फिरते हो ?

यह सुन कर बीरबल भी ताव में आ गए । बोले , अगर रानी का दूध पिलवा दें तो क्या दोगे ? टोडरमल ने लंबा फेंकते हुए कहा कि पाँच सौ रुपए देंगे । बीरबल मान गए । अब क्या हुआ कि एक दिन धोबी रानी के कपड़े ले कर महल जा रहा था । बीरबल ने उसे बहाने से बुलाया । बात-बात में फंसाया । और धीरे से रानी के ऊपर के अधोवस्त्र में खुजली की दवा डाल दिया l फिर धोबी चला गया ।

रानी ने जब अधोवस्त्र यानी ब्रा पहना तो भारी खुजली शुरू हो गई । एक ब्रा उतारा , दूसरा पहना , तीसरा पहना । पर खुजली बढ़ती ही गई । फिर सभी ब्रा उतार दिया । लेकिन खुजली नहीं गई । बात अकबर तक पहुंची । अकबर ने लाज में ही सही , हकीम और वैद्य बुलवा लिए । सब ने उपचार शुरू किया । पर खुजली ख़त्म ही न हो । अंतत: अकबर ने बीरबल को बुलवाया । समस्या बताई ।

बीरबल गहरी सोच में पड़ गए । थोड़ी देर बाद अकबर से कहा कि एक उपाय है तो सही पर बहुत अटपटा है । आप बुरा मान जाएंगे । अकबर रानी का दुख देख नहीं पा रहे थे । बीरबल से कहा कि तुम बेफिक्र हो कर उपाय बताओ । डरो नहीं । बुरा नहीं मानूंगा । बीरबल ने हिचकते हुए बताया कि टोडरमल को बुलवा लीजिए और उन से रानी का दूध पिलवा दीजिए । रानी की खुजली ठीक हो जाएगी ।

यह सुनते ही अकबर बीरबल पर भड़क गया । बोला , क्या बेहूदगी है । बीरबल ने कहा कि हुजूर ने उपाय पूछा था , बता दिया । अब यह आप को अख्तियार है कि मत मानिए । लेकिन अकबर रानी का दुख देख नहीं पा रहा था । टोडरमल को बुलाया गया । टोडरमल ने रानी का दूध जी भर पिया । एक तो खुजली की दवा असर खो चुकी थी । वैद्य , हकीम की दवा भी काम कर रही थी । फिर टोडरमल ने पूरे मन से रानी का दूध पिया । रानी के स्तन की खुजली समाप्त हो गई । अकबर खुश हो गया । बीरबल से भी और टोडरमल से भी । बात खत्म हो गई ।

इस घटना को बहुत दिन बीत गए पर टोडरमल ने बीरबल को वादे के मुताबिक़ पाँच सौ रुपए नहीं दिए । बीरबल ने बहुत टोकटाकी की । लेकिन टोडरमल ने बीरबल की बात को गंभीरता से नहीं लिया । एक दिन बीरबल ने टोडरमल से कहा कि बहुत लंबा भुगत जाओगे । सोच लो । टोडरमल ने कहा , जो उखाड़ना हो , उखाड़ लो । पाँच सौ रुपया नहीं दूंगा ।

बीरबल चुप रह गए ।

अब एक दिन धोबी अकबर के कपड़े ले कर महल जा रहा था । बीरबल ने उसे अपने पास बुलाया । बातों बातों में अकबर के अधोवस्त्र में वही खुजली की दवा डाल दिया । अब अधोवस्त्र पहनने पर अकबर की भी रानी जैसी दुर्दशा शुरू हो गई । लाख यत्न कर लिए पर खुजली ख़त्म ही न हो । अकबर ने इस बार न वैद्य बुलाया , न हकीम , न बीरबल । सीधे टोडरमल को बुलवाया । और उन्हें काम पर लगा दिया । टोडरमल काम पर लग तो गए । पर मन ही मन पछताने लगे कि काश बीरबल से पंगा न लिया होता । बीरबल से होशियारी न की होती । उसे वादे के मुताबिक़ पाँच सौ रुपए दे दिए होते तो यह नौबत न आती ।

तो राहुल गांधी वही होशियार टोडरमल हैं। पंगा लेते रहते हैं। पंगा लेने का लुत्फ उठाते रहते हैं। मोदी को लाभ और आनंद देते हुए उन को मज़बूत करते रहते हैं । कोई क्या कर सकता है भला !

Courtesy: Dayanand Pandey:( The views expressed solely belong to the writer only)

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