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Editorial
हिंदू धर्म की न किसी से प्रतिद्वन्द्विता है न वैर ।
केवल हिंदू धर्म ही है जो बिना किसी भेदभाव के संपूर्ण जड़ चेतन जगत को एक परिवार का अंग मानता है और उसके कल्याण की कामना करता है ।
यू.पी चुनाव रिजल्ट: योगी जी हैदराबाद तो क्या पाकिस्तान से भी चुनाव जीत सकते हैं !
उत्तर प्रदेश का चुनाव परिणाम सबके सामने है। जबकि रामपुर जैसी कुछ सीटें तो ऐसी है कि जहां मुस्लिम समाज के सरिया कैंडिडेट से कम कोई गुंजाइश नहीं। योगी जी ने वैसी भी सीटें जीत लीं। 17 के 17…
कर्नाटक में भाजपा की पराजय का विश्लेषण
भाजपा अपनी चुनावी तैयारी केवल चुनाव जीतने के लिए नहीं, बल्कि चुनाव बाद स्थाई सरकार चलाने के हिसाब से करती है। हाँ इस प्रकार की तैयारी बहुत बड़ा चुनावी दांव होता है, जिसकी कीमत चुनाव हार कर…
रिव्यू नहीं विमर्श: द केरला स्टोरी
"द केरला स्टोरी" फिल्म दर्शकों को बस एक किक देता है और ऐसा बेहतरीन किक कि ढाई घंटे में सदियों के संगठन का सरिया और मजहब, दर्शकों को समझ आने लगता है।
भगवान शिव क्यों रोये थे?
भगवान शिव जब पत्नी का शव उठाये बिलख रहे होते हैं, तभी उनकी करुणा उभर कर आती है, और दिखता है कि संसार का सबसे शक्तिशाली पुरुष अंदर से कितना कोमल है। उनके भीतर की यही कोमलता सामान्य मनुष्य के…
हमारे समाज के लेखक का कबीर आख़िर कहां गुम हो गया है ?
तो क्या बहुतायत देशवासी भाजपाई और संघी हो गए हैं ? हो गए हैं तो क्यों हो गए हैं ? इन लेखकों को क्या इस पर विचार नहीं करना चाहिए । जैसा कि हर असहमत को इन के द्वारा भाजपाई , संघी कहने से लगता…
ब्रहमसूत्र का पहला सूत्र क्या है ?
"अथातो ब्रह्म जिज्ञासा"
ब्रहमसूत्र का यह पहला सूत्र है ! अब ब्रह्म की जिज्ञासा शुरू होती है ! जिज्ञासा ज्ञान की पहली सीढ़ी है ! जिज्ञासा ही ज्ञान तक ले जाती है । प्रबल जिज्ञासा हो तो…
भारतीय लड़कियां इस्लाम क्यों कबूल करती हैं ?
जन्नत में अल्लाह ने लड़कियों के लिए कोई भी वादा नहीं किया है , न वहाँ उनके लिए शौहर मिलने का कोई वादा है न शराब । जबकि मर्दों को वहाँ खूबसूरत और हमेशा जवान रहने वाली हूरों का बंदोबस्त है ।
प्रेम के जाल में फंसा कर छल किये जाने का क्रूरतम अत्याचार दर्शाती है “द केरल…
पश्चिम से आने वाले बर्बर आतंकी भारत में विजयी होने के बाद यहाँ की स्त्रियों बालिकाओं के साथ कैसा राक्षसी व्यवहार करते थे, यह इतिहास की किताबें रो-रो कर बताती रही हैं। यहाँ से…
हाँ हमारा भगवान रोता भी है
रुद्राक्ष तो भगवान शिव के आँसुओं के ही प्रतीक माने जाते हैं । यदि हमारे भगवान में दया करुणा की कोई भावना ही न हो तो भक्ति और आराधना का सारा उद्देश्य ही विफल हो जाये ।