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Editorial
अगर लालू और राबड़ी के लड़के नहीं पढ़ पाए तो क्या इसमें ब्राह्मणों का दोष है ?
Positive India:Rajkamal Goswami:
आरक्षण के पीछे तर्क दिया गया था कि इतिहास में असमानता पूर्ण व्यवहार के कारण जो वर्ग पीछे रह गये हैं उन्हें समाज की मुख्य धारा में बराबरी पर लाया जा सके ।…
इन तस्वीरों में से कोई भी फ़र्ज़ी नहीं है!
मिचेल मार्श ने विश्व कप ट्रॉफ़ी पर पैर रखकर कुछ नया नहीं किया। यों भी, पैर लगने से किसी वस्तु का अपमान होता है, यह भारतीय, और उसमें भी हिंदू संस्कृति का विचार है। पश्चिम के लोग शरीर के बाक़ी…
जहां सिर तन से जुदा हो रहा हो , ग़ालिब , शेक्सपियर ,कालिदास काम नहीं आते
हिंदू , मुसलमान एक बड़ी सचाई है । जैसे यहूदी , मुसलमान । जैसे क्रिश्चियन , मुसलमान । लेकिन हिप्पोक्रेटों को ग़ाज़ा में नरसंहार तो दिखता है , इज़रायल में हुआ 7 अक्टूबर का नरसंहार नहीं दिखता ।…
यह विश्वकप हमारा है !
यह विश्वकप टीम रोहित का है भाई साहब! यह वर्ड कप अपना है...
आप अपने राज्य का भविष्य अर्थात कल कैसा चाहते हैं? घर से निकले और वोट करें
अपने राज्य का भविष्य अर्थात कल कैसा चाहते हैं...?
वही घपले,घोटाले और मुस्लिम तुष्टीकरण वाला या फिर विकासशील,सुरक्षित और हिंदुत्व की विचारधारा से ओत प्रोत!!
नेहरू का इतना विरोध क्यों है ?
नेहरू न होते तो इंदिरा राजीव और राहुल भी न होते । देश को बहुत सारी समस्याओं से छुटकारा मिल जाता । गुट निरपेक्षता की नीति भी न होती । या तो भारत अमेरिकी गुट में शामिल हो कर इस्राइल बन गया…
साम्यवादी आक्रमण से बचना हमारे देश का सौभाग्य क्यों है?
साम्यवादी आक्रमण इतना सुनियोजित, इतना शातिर और इतना शक्तिशाली था कि आज भी हम उसके थपेड़ों को झेलते हैं।।
100 साल के इस आक्रमण ने हिन्दुओं को सर्वथा बेहोश, विवेकशून्य और हीनभावना से ग्रस्त…
मन बांधने की वस्तु क्यों है ?
"ईश्वर ने आदमी की सीमा उसके शरीर से बांध दी, नाहक़ दौड़धूप करके हम दु:ख को ही न्योतते हैं।"
सावरकर की समकक्षता में, राजनीतिक फलक पर न गांधी आते हैं न नेहरू
गांधी की सफलता और गांधी का पाखंड, कांग्रेस की गांधी पर निर्भरता और कांग्रेस का पाखंड। इस टुच्चेपन की तुलना सावरकर के गौरवशाली जीवन से करते हुए सावरकर को तुच्छ बना कर पेश करने की राजनीति पर…
श्रीकृष्ण का सबसे पहले नामोल्लेख किस ग्रंथ में हुआ है?
Positive India: Sushobhit:
भागवत में नहीं। महाभारत-हरिवंश में नहीं। ब्रह्मवैवर्त का तो प्रश्न ही नहीं उठता। श्रीकृष्ण का सबसे पहले नामोल्लेख हुआ है- छान्दोग्योपनिषद् में!
वेदों में…