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Editorial
भारत में वामपंथी राजनीति का अस्तित्व
वामपंथ भारत के स्वर्णिम भविष्य में सिर्फ़ इतिहास होकर रह जाएगा।
हाय गज्जब एक तारा टूटा
राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा का यज्ञ निर्विघ्न पूरा हो।
ग़ालिब की हवेली
"पूछते हैं वो कि 'ग़ालिब' कौन है
कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या?"
जैसे कैकेयी राम का पुन: वनवास मांग रही हो !
सारे गिद्ध असल में अयोध्या के राम मंदिर पर बुरी नज़र लगाने वाले कलयुगी रावणों को चोंच मार-मार कर नष्ट करने के लिए इकट्ठा हो रहे हैं।
राम मंदिर और चंपत राय के बहाने कुछ सयाने लोग और उन के निशाने
कौन है ये चम्पतराय.??
कैसे आते हैं श्रीराम!
Positive India:Sarvesh Kumar Tiwari:
उस घने वन में एक ओर सीधे सादे भीलों की बस्तियां होतीं थीं, तो दूसरी ओर तपस्वी ऋषियों के आश्रम! प्रकृति द्वारा निर्मित व्यवस्था के अनुसार जीवन यापन…
मैं आई हूँ यूपी बिहार लूटने !
यूपी बिहार को स्वार्थी जातिवादी , धर्मवादी राजनीति ने तबाह कर दिया !
जातिवादी राजनीति केवल अपनी जाति का डंडा ऊँचा रखने में खुश रहती है और कभी पूरब का मांचेस्टर कहा जाने वाला कानपुर उद्योगों…
संसार में इतने लोग भोजन करते हैं, उनके बरतन कौन मांजता है?
बड़े से बड़ा धन्नासेठ भी अपने जूतों के तस्में स्वयं बाँधता है, कमीज़ के बटन किसी दास से नहीं लगवाता। नृपेन्द्र के केश कोई और काढ़ता हो, वैसी बात नहीं है।
सनातन धर्म केवल एक मान्यता पर चलने वाले लोगों का समूह क्यों नहीं है ?
सनातन धर्म केवल एक मान्यता पर चलने वाले लोगों का समूह नहीं। यह एक विराट संस्कृति है, यहाँ एक साथ असंख्य आध्यात्मिक धाराएं बहती हैं।
हिप्पोक्रेट वामपंथियों की ख़ामोशी तो देखिए !
साहित्य अकदमी अवार्ड वापसी सिर्फ हवा-हवाई ऐलान था। शोशेबाज़ी थी।