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Editorial
अमित शाह को नरेन्द्र मोदी ने बनाया गृहमंत्री
अमित शाह बतौर गृहमंत्री एक सख्त प्रशासक के रूप में जाने जाते हैं फिर चाहे सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर केस ही क्यों ना हो, जो गुजरात में हिंदू मुस्लिम दंगे भड़का कर भारत को अस्थिर करने की…
सबका साथ सबका विकास बनाम मुस्लिम वोट बैंक
आज का मतदाता जागरूक हो गया है, उसे कहाँ वोट देना है मालूम हो गया है । इसलिए पश्चिम बंगाल मे भी भाजपा ने अठारह लोकसभा में कमल खिला दिया है जहाँ उसका कोई नाम लेवा भी नही था।
नरेंद्र मोदी बने भारत के प्रधानमंत्री
सबसे खास बात यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 मिनिस्टर, जो पिछली कौंसिल ऑफ मिनिस्टर में उनके सदस्य थे,उनको मौका नहीं दिया है। इनमें सबसे खास हैं स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा,…
जनसंख्या पर नियंत्रण बनाम बाबा रामदेव फार्मूला
परिवार नियोजन कार्यक्रम मे अति उत्साहित कार्यकर्ताओ ने जोर जबरदस्ती कर इसको बहुत नुकसान पहुंचाया । वही टार्गेट के चक्कर मे परिवार नियोजन के आप्रेशन मे छोटे-छोटे मानवीय भूल के कारण बहुत बड़ी…
वीर सावरकर अखंड भारत की कल्पना वाले स्वतंत्रता सेनानी थे
इस बात को ही माना जाये कि सावरकर जी दो देश के सिद्धांत के प्रणेता थे, जिस पर आगे चलकर जिन्ना ने पाकिस्तान बनाया । फिर ऐसे नेता की याद मे स्व. इंदिरा गांधी जी की सरकार ने डाक टिकट कैसे जारी…
मोदी युग में कांग्रेस के लिए अस्तित्व की लड़ाई
जो दल पूरे देश मे एक क्षत्र राज्य कर रहा था, आज प्रतिपक्ष के नेता के पद के लिए अयोग्य है । राजनीति मे इससे ज्यादा दुर्दशा और क्या हो सकती है?
मतदाताओं ने राहुल गांधी के 72000 को क्यो ठेंगा दिखा दिया?
महागठबंधन का जो खौफ दिखाया जा रहा था उसका हश्र ऐसा होगा इसकी कल्पना तक किसी ने नही की थी । जिनका नाम ही काफी था उन्हे भी घर का रास्ता दिखा दिया गया है । लोगो ने षड्यंत्र पूर्वक राजनीति करने…
जीती जागती डिवाइस बनती हमारी जिंदगी।
डिवाइस का प्रयोग करते करते हम खुद डिवाइस हो गये ,हमें पता भी नहीं चला।जी हाँ ये इंटरनेट ये सोशल मीडिया ने कब हमारे निजी जिंदगी में सेंध मार कर हमारे सुख चैन ,पारिवारिक संबंधों ,हमारी…
नरेन्द्र मोदी की महाविजय तथा सशक्त विपक्ष की अपरिहार्यता
देखा जाए तो सत्ता से ज्यादा विपक्ष की भूमिका राष्ट्रीय हित के मामले मे सर्वोपरि रहती है । जब सरकार निरंकुश हो जाये तो नकेल कसने का महत्व पूर्ण काम भी विपक्ष ही करता है ।
आज का परिणाम भारत के लिए एक नई शुरुआत
इस चुनाव मे नेताओं ने अपनी पूरी लक्ष्मण रेखा पार कर दी । वही भाषा का स्तर भी काफी निम्न रहा । ऐसा कही से नही लग रहा था कि हम राष्ट्रीय स्तर के नेताओ के भाषण सुन रहे है ।