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Editorial

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के जन्मदिन पर विशेष

पॉजिटिव इंडिया: रायपुर 23अगस्त, *गजेन्द्र साहू दृवारा विशेष* ये वाक्या रायपुर के प्रतिष्ठित साईंस कॉलेज का है । समय का सही ज्ञान नहीं पर घटना सत्य है । BSC की कक्षा का पंखा अचानक…

गिरफ्तारी के साथ पी चिदंबरम की लुका छिपी का हुआ अन्त

इस देश का इतना बड़ा सियासतदान और कानूनविद को भागने की नौबत आ गई, इससे साबित होता है कि पी चिदंबरम कसूरवार है। कानून देर से काम करता है, पर करता है। उसके सामने छोटे बड़े, अमीर गरीब, जात पात,…

हिंदुस्तानियत,कश्मीरियत और इन्सानियत-प्रथम किश्त

06/08/1947 को गांधी ने संक्षिप्त नोट लिखकर नेहरू और वल्लभभाई पटेल को भेजा। गुजराती के पत्र में गांधी ने पटेल को लिखा, "तुम्हें इस मामले में कुछ करना चाहिए। मेरे ख्याल से कश्मीर का मामला सुधर…

100 % आरक्षण की ओर बढ़ते कदम

आज तो लगता है कि यह देश बगैर आरक्षण का चल नही सकता । पूरा खेल अपने राजनीतिक फायदे के लिए है । इस देश ने पोलियो से मुक्ति पा ली, पर आरक्षण से मुक्ति पाना कठिन है । दुर्भाग्य यह है कि लोग इससे…

तुम हमारे इतवार क्यों हो?

अग्निमय नायक सुभाष बोस आज़ादी के आंदोलन की कड़ियल छाती का लावा हैं। ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा‘ और ‘गुलामी के घी से आजादी की घास बेहतर है‘ जैसे पौरुषपूर्ण नारों के साथ सुभाष…

स्वतंत्रता दिवस पर भारत रुबरु हुआ एक मजबूत प्रधानमंत्री से

मोदी जी इतने मजबूत नेता बन गए है कि बलूचिस्तान पख्तून और पी ओ के लोग खुले आम अपने लिए मदद मांग रहे है । एक बात निश्चित है इस देश को आजादी के बाद पहली बार इतना मजबूत प्रधानमंत्री मिला है ।

पहले झंडा वंदन फिर रक्षाबंधन

मुझे लगता है कि *पहले झंडा वंदन फिर रक्षाबंधन* ही हो । आज़ादी के ७० साल बाद भी यदि हमें देशभक्ति के साथ समझौता करना पड़े तो धिक्कार है ऐसी देशभक्ति पर ।

बंद है मुट्ठी लाख की, खुली जो प्यारे खा़क की।

मैं मुट्ठी बंद करता हूं तो उसके अंदर जीवन नहीं यादें घुस जाती हैं । मैं यादों को भींच रहा हूं । उनसे अलग नहीं हो पाता हूं क्योंकि मुट्ठी चाहने पर भी खुल नहीं रही है। बंद है मुट्ठी लाख की…