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Editorial
जंगल राज की फिर ग़लती से भी वापसी न हो , इस लिए ऐसा मुसलसल लिख रहा हूं
उत्तर प्रदेश की तरक़्क़ी के लिए जंगल राज को रोकना बहुत ज़रुरी है। चाहे कुछ भी करना पड़े। मनुष्यता के लिए भी जंगल राज को रोकना बहुत ज़रुरी है।
आज अगर हिम्मत के साथ कोई लड़ रहा है तो वह रसिया ही है।
यूक्रेन समेत तमाम वामपंथी लॉबी पूरी कोशिश कर रहे हैं कि रसिया में गृह युद्ध उत्पन्न कर दी जाए। रसिया के लोगों को सड़क पर निकलने के लिए मानवता की दुहाई दे रहे हैं।
इन जालसाजों ठगों को सबूत के साथ पहचानने की क्यों जरूरत है ?
5 वर्ष पूर्व 2017 में हुए उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान भी यही न्यूजचैनल इसी तरह का अभियान चला कर सरासर सफेद झूठ को प्रचारित कर के उत्तरप्रदेश की जनता को भ्रमित करने, उसे बरगलाने में…
सावरकर को कभी ऐसे भी जानिए न !
इंदिरा गांधी ने संसद में सावरकर का चित्र क्यों लगाया ? इंदिरा गांधी ने सावरकर के नाम पर डाक टिकट क्यों जारी किया। इंदिरा गांधी ने 1970 में डाक टिकट जारी करते हुए सावरकर को वीर योद्धा क्यों…
जब शराब के चक्कर में फ़िराक गोरखपुरी की गोरखपुर में ज़मानत ज़ब्त हो गई
फ़िराक बड़ी शान से कहा करते थे कि हिंदुस्तान में अंगरेजी सिर्फ़ ढाई लोग जानते हैं । एक खुद को मानते थे , दूसरे सी नीरद चौधरी और आधा जवाहरलाल नेहरु।
यूक्रेन में बच्चों की सुरक्षा को ले कर विघ्न संतोषियों की आत्मा अचानक फिर क्यों जाग…
वैचारिक कोढ़ियों को सर्वदा एक छेद खोज कर भारत को गरियाने की लत लग गई है। भारत को अपमानित करना इन की बीमारी है। इस एक बीमारी का इलाज भी बहुत ज़रुरी है।
क्या लेफ्ट लॉबी ने स्वीकार लिया है कि भारत विश्व पटल पर उभर कर आया है ?
यूक्रेनियन राजदूत डॉ इगोर पोलिखा ने कहा कि भारत ग्लोबल पावरफुल प्लेयर है और मोदी जी इज वन ऑफ द मोस्ट पावरफुल रिस्पेक्टेड लीडर ऑफ द वर्ल्ड। पोलिखा के इस बयान को कोई डिजाइनर मीडिया लिखने…
कामरेड , रुस के उक्रेन युद्ध पर भी लब क्यों नहीं खोल रहे ?
कहां गुम है वह दिल्ली यूनिवर्सिटी वाली लड़की , जिसे युद्ध पसंद नहीं था।
अहमदाबाद ब्लास्ट केस में 49 शांति दूतों को फांसी अथवा उम्र कैद की सजा का विश्लेषण
लेकिन आज 49 शांति दूतों को फांसी अथवा उम्र कैद की सजा मुकर्रर हुई है। असहिष्णुता का रोना रोने वालों ने क्या कभी इन 49 शांतिदूतों के पीछे की मानसिकता पर रिपोर्ट दिखाने की हिम्मत जुटाई? गुजरात…
साइकिल बम की सिसकी और न रहे सांप , न बजे बांसुरी की धुन में दंगेश की त्रासदी लिए…
कैराना पलायन के अपराधियों और मुज़फ़्फ़र नगर के दंगाइयों पर अखिलेश के उपकार आज भी जारी हैं। योगी ने अखिलेश यादव की इसी फितरत को देखते हुए अखिलेश को दंगेश नाम दे दिया है। दंगा , गुंडई , आतंकवाद ,…