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Editorial
औरंगजेब आक्रांता था या आदर्श ? उत्तर जानकर आप हैरत में क्यो पड़ जाएंगे?
औरंगजेब से लेकर बुरहान बानी तक जैसे आतंकियों के लिए ईमान वालों के मन में सम्मान स्वाभाविक बात है। पर इसमें सबसे नई बात यह है कि ये बात अब खुलकर सामने आने लगी है।
आखिर कहाँ खो गए भारत के ७ लाख ३२ हज़ार गुरुकुल एवं विज्ञान की २० से अधिक शाखाएं ?
“दुर्भाग्य है कि भारत में हम अपने श्रेष्ठतम सृजनात्मक पुरुषों को भूल चुके है। इसका कारण विदेशियत का प्रभाव और अपने बारे में हीनता बोध की मानसिक ग्रंथि से देश के बुद्धिमान लोग ग्रस्त है” –…
ओवैसी ने क्यों कहा बाबरी शहीद हो गया अब हम और कोई दूसरी शहादत नहीं दे सकते ?
गजनबी और गोरी से लेकर औरंगजेब तक ने एक बार नहीं चार बार काशी को तोड़ा। हमने कभी बदला नहीं लिया। गजनबी से शुरू हुआ यह सिलसिला सुल्तानों ने बार-बार तुड़वाया, सनातन धर्मियों ने अपने सामर्थ्य से…
कश्मीर में सेना भी मार रही एक के बदले 10 हमलावर
कश्मीरी पंडितों की हत्या अगर होती है तो क्या उन विपक्षियों का मुंह मे दही जमाये बैठ जाना सही है? क्या उन्हें कश्मीरी पंडितों का हौसला बढ़ाने आगे नही आना चाहिए? यहा तो विपक्ष की भूमिका लगती है…
भारतीय नेवी ने पाकिस्तानी गाजी पनडुब्बी को कैसे जल समाधि दी ?
पाकिस्तान आज तक यह समझ ही नहीं पाया कि गाजी जैसी शक्तिशाली पनडुब्बी को भारत ने इतनी आसानी से कैसे तबाह कर डाला था ।
अगर तुलना करनी ही है आज़म खान की तो औरंगज़ेब से ज़रूर कर सकते हैं
रामपुर की यूनिवर्सिटी आज़म खान के अवैध पैसे से ही बनी। कितने गरीब मुसलमानों की ज़मीन हड़पी है आज़म खान ने ।
रामपुर में तमाम दलितों का इस्लाम में धर्मांतरण करवाने का अपराधी है आज़म खान।
ओवैसी…
रद्द होती परीक्षाओं की पीड़ा…
नीतीश बाबू, जिसने बीपीएससी का पेपर लीक किया है उसे केवल सस्पेंड कर के क्या बिगाड़ लेंगे आप? एक साल में दुबारा ज्वाइन कर लेगा वह। होना तो यह चाहिये था कि आप उस पूरे सिस्टम को बर्खास्त करते,…
परमाणु परीक्षण के बहाने और निशाने श्रीलंका के रास्ते पर भारत नहीं , पाकिस्तान चल पड़ा…
विपक्ष की मनोकामना है कि भारत में भी श्रीलंका वाली आगजनी हो। मोदी फूंक दिया जाए। भूल जाते हैं यह मनोकामना करते हुए कि श्रीलंका , चीन का उपनिवेश बन चुका है। सब कुछ चीन करवा रहा है श्रीलंका…
तो भीलवाड़ा में आदर्श भी मारा गया
पर धर्मनिरपेक्ष सरकारें इन हत्याओं पर आंखें मूंदें हुए हैं. तथाकथित सेकुलर बुद्धिजीवियों को ये मॉब लिंचिंग नज़र नही आती।
वह घुंघराले बाल और संतूर की मिठास ! आह !
पंडित शिव कुमार शर्मा का संगीत तो अमर है , सर्वदा रहेगा। मेरे मन में भी। मेरे लिखने में भी पंडित शिव कुमार शर्मा का संतूर बजता ही रहेगा। बस वही नहीं रहेंगे।