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#editorial

अज्ञेय : फिर कहां से तुम ने विष पाया और कहां से सीखा डसना?

कहे अनकहे ढेर सारे महिला प्रसंगों के बावजूद सचमुच न जाने क्यों जीवन में अज्ञेय सचमुच अज्ञेय ही थे। सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’।

आचार्य के अवदान से गुलज़ार ज्ञानपीठ

1976 में सात स्वर्ण पदकों और कुलाधिपति स्वर्ण पदक के साथ रामभद्राचार्य जी ने आचार्य की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। रामभद्राचार्य भी संस्कृत के बड़े रचनाकार हैं। कवि हैं। अनेक महाकाव्य , खंड…

“ब्राह्मण और बनियों भारत छोड़ो “ जेएनयू का नया नारा है क्या?

ब्राह्मण बनिया भारत छोड़ो ! नारा भी उसी गति को प्राप्त हो जाएगा जिसको बसपा का यह नारा उपलब्ध हुआ, तिलक तराज़ू और तलवार इनको मारो जूते चार

अगर लालू और राबड़ी के लड़के नहीं पढ़ पाए तो क्या इसमें ब्राह्मणों का दोष है ?

Positive India:Rajkamal Goswami: आरक्षण के पीछे तर्क दिया गया था कि इतिहास में असमानता पूर्ण व्यवहार के कारण जो वर्ग पीछे रह गये हैं उन्हें समाज की मुख्य धारा में बराबरी पर लाया जा सके ।…

तुग़लक़ पागल नहीं , बहुत बुद्धिमान था पर बतौर प्रशासक अक्षम भी लेकिन आज के तुग़लक़ ?

Positive India:Dayanand Pandey: राजनीति में कुछ लोग सेक्यूलर होने का ढोंग चाहे जितना भी कर लें , लेकिन धर्म का राजनीति पर हमेशा से बहुत गहरा प्रभाव रहा है , सर्वदा रहेगा । एक शासक हुआ है…

भारत में बैठकर बेंजामिन नेतन्याहू से प्रश्न?

विश्व भर के मुसलमान सबसे ज्यादा ध्रुवीकृत हो रहे हैं, लेकिन जो बच गए चाहे वे ज्यूस हों या हिंदू, कितने भी तटस्थ हों, आखिरकार अध्रुवीकृत हुए कैसे रह सकते हैं?

नुस्खा यह है कि काशी और मथुरा को अगर पूरी ईमानदारी से विपक्ष उठा ले तो भाजपा चारो…

जो लोग प्रभु राम के अस्तित्व पर ही प्रश्न उठाते रहे , बेशर्मी की हद तक उतर कर पूछते रहे थे कि मंदिर वहीं बनाएंगे पर तारीख़ नहीं बताएंगे। अब यह लोग भी अब राम के चरणों में लेट गए हैं। फिर भी…

कुछ मतिमंद और जहरीले विद्वानों को आज पता लगा कि नरेंद्र मोदी इवेंट के मास्टर हैं

तिहरा तलाक़ और 370 दोनों ही कमीनेपन और धूर्तता के औजार से ही निपटाए जा सकते थे। सरलता , विनम्रता और सादगी से नहीं। सठे साठ्यम समाचरेत की तकनीक की ज़रूरत थी । मोदी ने इसी औज़ार और तकनीक का तागा…