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नुस्खा यह है कि काशी और मथुरा को अगर पूरी ईमानदारी से विपक्ष उठा ले तो भाजपा चारो खाने चित्त हो जाएगी !

-दयानंद पांडेय की कलम से-

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Positive India:Dayanand Pandey:
इन दिनों कांग्रेस , सपा , बसपा , आप समेत सभी पार्टियां अयोध्या में बन रहे राम मंदिर के गुण-गान में व्यस्त हैं। क्यों कि इन्हें मुस्लिम वोटर की आंख में धूल झोंकने के बाद अब हिंदू वोटर की आंख में धूल झोंकने की सूझी है। इसी लिए जो लोग गर्भ गृह पर शौचालय बनाने की बात करते थे , मिले मुलायम कांशीराम , हवा में उड़ गए जय श्री राम ! या तिलक , तराजू और तलवार , इन को मारो जूते चार का उद्घोष करते थे। ठीक यही लोग अब राम मंदिर बनाने की बढ़-चढ़ कर बात कर रहे। ब्राह्मणों को लुभाने के लिए प्रबुद्ध सम्मेलन पर सम्मेलन कर रहे। परशुराम की भव्य मूर्ति की रेस आयोजित कर रहे हैं। जो लोग कार सेवकों पर गोली चलवाने का अभिमान करते थे , मंदिर के लिए पत्थर अयोध्या न पहुंच पाए , इस का इंतज़ाम करते थे। वह लोग भी आज प्रभु राम के गुण-गान में व्यस्त हैं। परशुराम-परशुराम का जाप कर रहे हैं। विद्यालय बनाने की तजवीज देने वाले भी शीश झुका चुके हैं। गरज यह कि अपनी-अपनी हिप्पोक्रेसी में धूल चाट चुके हैं। या यूं कहिए कि थूक-थूक कर चाट चुके हैं। सभी के सभी।

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और तो और जो लोग प्रभु राम के अस्तित्व पर ही प्रश्न उठाते रहे , बेशर्मी की हद तक उतर कर पूछते रहे थे कि मंदिर वहीं बनाएंगे पर तारीख़ नहीं बताएंगे। अब यह लोग भी अब राम के चरणों में लेट गए हैं। फिर भी इन लोगों को चुनाव में लाभ मिलता नहीं दिख रहा , हिंदू वोटों का। इन सभी लोगों को हिंदू वोटों का लाभ मिलने का एक नुस्खा मेरे पास है। और मुफ़्त का है। जानता हूं कि मुफ़्त की राय लोग नहीं मानते चुनावी जीत की तलब वाले लोग। करोड़ो की फीस दे कर प्रशांत किशोर जैसों की राय की कद्र करते हैं लोग। लेकिन फिर भी नुस्खा बता रहा हूं , और मुफ्त में बता रहा हूं। अगर यह चौकड़ी मान जाए तो यक़ीन मानिए , पूरे उत्तर प्रदेश में भाजपा उम्मीदवारों की ज़मानत ज़ब्त हो जाएगी।

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नुस्खा यह है कि काशी और मथुरा को अगर पूरी ईमानदारी से विपक्ष उठा ले तो भाजपा चारो खाने चित्त हो जाएगी। गरज यह कि इन लोगों को अयोध्या में राम मंदिर की स्तुति गान छोड़ कर मथुरा में कृष्ण मंदिर और काशी में बाबा विश्वनाथ मंदिर परिसर से ज्ञानवापी मस्जिद हटा कर बाबा विश्वनाथ मंदिर के निर्माण का शंखनाद कर देना चाहिए। पूरी ईमानदारी से। ईंट से ईंट बजा देनी चाहिए शिव और कृष्ण मंदिर निर्माण तक। ठीक वैसे ही जैसे नवजोत सिंह सिद्धू ने कैप्टन अमरिंदर सिंह के हटने तक उन की ईंट से ईंट बजा दी थी। बजाते रहे थे। वैसे भी राम ही नहीं , शिव और कृष्ण भी हिंदू वोटर के हृदय में वास करते हैं। राम मनोहर लोहिया ने बहुत साफ़ लिखा है :

राम, कृष्ण और शिव भारत में पूर्णता के तीन महान स्वप्न हैं। सबके रास्ते अलग-अलग हैं। राम की पूर्णता मर्यादित व्यक्तित्व में है, कृष्ण की उन्मुक्त या संपूर्ण व्यक्तित्व में और शिव की असीमित व्यक्तित्व में लेकिन हरेक पूर्ण है। किसी एक का एक या दूसरे से अधिक या कम पूर्ण होने का कोई सवाल नहीं उठता। पूर्णता में विभेद कैसे हो सकता है? पूर्णता में केवल गुण और किस्म का विभेद होता है।

यक़ीन मानिए अगर विपक्ष के लोग मथुरा और काशी में कृष्ण और शिव का मंदिर बनाने की ठान लें जैसे भाजपा और आर एस एस के लोगों ने राम मंदिर बनाने की ठान ली थी , बना कर ही माने। तो भाजपा की योगी सरकार ही नहीं , मोदी सरकार भी यह लोग उखाड़ फेकेंगे। मोदी , योगी दुनिया में मुंह दिखाने लायक़ नहीं रहेंगे। सेक्यूलरिज्म की जीत हो जाएगी सो अलग। आप लोगों ने तमाम फ़ोटो देखी होंगी। जैसे रामलीला के समय में कोई बुरका पहने स्त्री अपने बच्चे को राम या लक्ष्मण बना कर रामलीला के लिए ले जाती हुई। कोई बुरकाधारी स्त्री अपने बच्चे को हनुमान बना देती है। कभी शिव या दुर्गा भी। कितना तो सेक्यूलरिज्म का प्रचार हो जाता है। लोगों के दिल भर आते हैं।

कभी किसी फ़ोटो में कोई मौलाना और संन्यासी एक साथ ताश खेलते दिख जाते हैं , एक बाइक या स्कूटर पर बैठे दिख जाते हैं तो कितना तो पॉजिटिव संदेश मिल जाता है। सेक्यूलरिज्म की बांछे खिल-खिल जाती हैं। ठीक इसी तरह जब कांग्रेस , सपा , बसपा , आप समेत सब लोग जब मथुरा और काशी में कृष्ण और शिव मंदिर बना कर इन को सम्मान देने की बात करेंगे तो देश में गंगा-जमुनी सभ्यता की लहरें उछाल मारेंगी। भाईचारे की भव्यता निखार पा जाएगी। भाजपा समाप्त हो जाएगी। आर एस एस की बुनियाद हिल जाएगी। मोदी , योगी जैसे फासिस्टों का अंत हो जाएगा। इंटरनेशनल मीडिया में , भारत में सेक्यूलरिज्म के क़सीदे पढ़े जाएंगे। बी बी सी से लगायत , फॉक्स , टाइम , न्यूज़वीक सब भारत की प्रशस्ति में बिछ-बिछ जाएंगे। कांग्रेस , सपा , बसपा , आप आदि सभी की बल्ले-बल्ले हो जाएगी ! इरफ़ान हबीब जैसे लोग भारत में अमन-चैन के इतिहास की नई इबारत लिखेंगे।

अब मुफ़्त का यह नुस्खा भले है पर है बहुत काम का। बात बस हिप्पोक्रेसी त्याग कर आज़मा लेने की है। अगर मोदी , योगी को हटाने का ज़ज़्बा है तो। हिंदू वोट की सचमुच तलब है तो। बाक़ी सिर्फ़ नौटंकी है तो यह नौटंकी मुसलसल जारी रखिए। हाल-फ़िलहाल के चुनाव में तो जनता आप को कतई कोई घास नहीं डालने वाली। इस लिए भी कि जनता-जनार्दन आप की नौटंकी के तार-बेतार सब जान चुकी है। किसान आंदोलन आदि के स्वांग भी अब स्वर्गीय हो चुके हैं। जीवित रहने का अब बस यही एक नुस्खा शेष रह गया है। गंगा-जमुनी तहज़ीब की नई इबारत लिखने का। ऐतिहासिक ग़लतियों को सुधार कर नया इतिहास रचने का। कभी जाइए आप काशी। काशी के विश्वनाथ मंदिर परिसर में ज्ञानवापी को निहारिए।

पूरा शिल्प , पूरा वास्तु मंदिर का है। बस भीतर मूर्तियां नहीं हैं। इसी तरह जाइए कभी मथुरा। कृष्ण का जन्म-स्थान देखिए। क्या कंस की जेल इतनी छोटी , इतनी कमज़ोर रही होगी। फिर मंदिर और मस्ज़िद की दीवार एक कैसे हो गई। मंदिर इतना छोटा , इतना कमज़ोर और मस्जिद इतनी बुलंद और शानदार। यह कैसे मुमकिन है भला। स्पष्ट है कि यह आक्रांताओं की क्रूरता का नतीज़ा है। आक्रमणकारी मनोविज्ञान है। तोड़-फोड़ है। तर्क और तथ्य तो यही है। सो इस ऐतिहासिक चूक को सही मायने में दुरुस्त करने का समय है यह। नहीं देश सांप्रदायिकता की आग में बरसो-बरस झुलसता ही रहेगा। यह कांग्रेस , यह वामपंथी , बसपा , सपा आदि-इत्यादि सब के सब इस आग में अपना हाथ सेंकते रहेंगे। हिंदू-मुसलमान करते रहेंगे।

उलटे चोर कोतवाल को डांटे की तर्ज पर भाजपा और आर एस एस पर तोहमत लगाते हुए देश में नफ़रत और जहर की खेती करते रहेंगे। मनुष्यता को कलंकित करते हुए मुस्लिम वोट बैंक , हिंदू वोट बैंक की बिरयानी खाते रहेंगे। ज़रुरत इस बिरयानी की सप्लाई को बंद करने की है। देश को तालिबान में तब्दील होने से रोकने की ज़रुरत है। क्यों कि कोई बात कभी भी एकतरफा और कुतर्क पर सर्वदा नहीं चल सकती। चलती होती तो आज इरफ़ान हबीब जैसे नाज़ायज़ और झूठे इतिहासकार सवालों के घेरे में न होते। इतना कि वह आज की तारीख़ में समुचित जवाब देने की हैसियत में भी नहीं रह गए हैं। सवाल-दर-सवाल खड़े हैं और वह अपने ही झूठ के मलबे में दबे हुए चुप-चुप से हैं।

साभार:दयानंद पांडेय-(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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