
पिछड़े वर्ग के लिए गठित काका कालेलकर रिपोर्ट पर जवाहर लाल की प्रतिक्रिया
-राजकमल गोस्वामी की कलम से-

Positive India: Rajkamal Goswami:
पिछड़े वर्ग के लिए गठित काका कालेलकर रिपोर्ट पर जवाहर लाल की प्रतिक्रिया
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नेहरू के पत्र का हिन्दी भावानुवाद (1955)
“हाल में पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट आई है। इसने हमारे सामने एक कठिन प्रश्न खड़ा कर दिया है—हम किन लोगों को ‘पिछड़ा’ मानें और किस आधार पर उनकी सहायता करें।
मुझे यह तरीका पसंद नहीं है कि हम हर समस्या को जाति के आधार पर देखें। यदि हम ऐसा करते हैं, तो हमें इस बात का खतरा है कि हम उसी जाति व्यवस्था को बनाए रखेंगे, जिसे हम समाप्त करना चाहते हैं।
हमारा उद्देश्य एक ऐसा समाज बनाना होना चाहिए जहाँ जाति का महत्व धीरे-धीरे कम हो जाए। इसलिए नीतियाँ बनाते समय हमें सावधान रहना होगा कि कहीं हम अनजाने में जाति को और मजबूत न कर दें।
निस्संदेह, हमारे देश में कई वर्ग ऐसे हैं जो वास्तव में बहुत पिछड़े हैं और उन्हें विशेष सहायता की आवश्यकता है। परंतु इस पिछड़ेपन का निर्धारण मुख्य रूप से आर्थिक स्थिति, शिक्षा के स्तर और जीवन की परिस्थितियों के आधार पर होना चाहिए—सिर्फ जाति के आधार पर नहीं।
यदि हम केवल जाति को आधार बनाते हैं, तो इससे समाज में विभाजन बढ़ सकता है और हम एक गलत दिशा में जा सकते हैं।
इसलिए हमें ऐसी नीतियाँ बनानी चाहिए जो वास्तव में जरूरतमंद लोगों की सहायता करें, बिना इस बात के कि वे किस जाति से संबंधित हैं, और साथ ही हम समाज को आगे बढ़ाने के अपने बड़े लक्ष्य—एक समान और आधुनिक भारत—की ओर बढ़ते रहें।”
जवाहरलाल नेहरू का पत्र:
* तारीख: 14–15 अप्रैल 1955
* दस्तावेज़: Letters to Chief Ministers
* स्रोत: Selected Works of Jawaharlal Nehru, Second Series
* Volume: Vol. 28
* पृष्ठ (Pages): pp. 576–583
बहुत से मित्रों को नेहरू से नाराज़गी है कि नेहरू के इसी रुख के कारण ओबीसी आरक्षण १९८९ तक टला रहा !
साभार:राजकमल गोस्वामी-(में लेखक के अपने विचार हैं)