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आरक्षण

आरक्षण अब नासूर बन गया है l कैंसर और एड्स से भी ज़्यादा ख़तरनाक

क्या सचमुच अंबेडकर संविधान निर्माता है ? अकेले ? 319 सदस्यों वाली संविधान सभा थी । इस संविधान सभा के अध्यक्ष थे राजेंद्र प्रसाद । वी एन राव सलाहकार । अंबेडकर सिर्फ़ एक ड्राफ्ट कमेटी का…

पिछड़े वर्ग के लिए गठित काका कालेलकर रिपोर्ट पर जवाहर लाल की प्रतिक्रिया

Positive India: Rajkamal Goswami: पिछड़े वर्ग के लिए गठित काका कालेलकर रिपोर्ट पर जवाहर लाल की प्रतिक्रिया ———————————— नेहरू के पत्र का हिन्दी भावानुवाद (1955) “हाल में पिछड़ा…

यूजीसी के कारण मोदी जी वीपी सिंह की गति को और भाजपा जनता दल की गति को प्राप्त हो…

मोदी जी ने ओबीसी वोटों के लालच में ओबीसी और दलितों को यूजीसी में एक प्लेटफार्म पर लाकर खड़ा कर दिया । भेड़ और भेड़िया दोनों शोषित वर्ग हो गये । दबंगई में सबसे कमजोर कायस्थ और ब्राह्मण शोषक…

नहीं सामाजिक समता की बात तो महात्मा बुद्ध भी करते थे , कार्ल मार्क्स भी

आरक्षण की खीर खाने के लिए कुतर्क करते रहिए। मौज करते रहिए। नो प्रॉब्लम। लेकिन आरक्षण की बैसाखी ले कर आप सरकारी नौकरी पा सकते हैं। सुविधाएं भी। पर सम्मान कभी नहीं।

उन जातियों के नौजवानों से जिनका कोई वोट बैंक नहीं है

जातिगत जनगणना लोकतंत्र का सबसे विद्रूप रूप है । मैं उन जातियों के नौजवानों का आह्वान करता हूँ जिनकी संख्या किसी का वोट बैंक बनने लायक़ नहीं है कि वे जम कर पढ़ाई करें ।

उन को मुस्लिम वोट चाहिए , इन को हिंदू ग्राहक

मुस्लिम को हिंदू नेता नहीं पर बहुसंख्यक हिंदू ग्राहक चाहिए। नहीं व्यापार बैठ जाएगा। हलाल सर्टिफिकेट का जूनून भी चाहिए। गाय का मांस भी चाहिए। खाद्य सामग्री पर थूकने आदि का अधिकार भी चाहिए।…

प्रतिभाहीन रेगिस्तान !

आलम यह है कि 96 प्रतिशत पर भी आप को विश्वविद्यालय में एडमिशन ही नहीं मिलता जब कि पचास प्रतिशत वाले को धड़ल्ले से एडमिशन मिल जाता है । तब पढ़ेगा भी कौन इस देश में । मेरिट का आलम यह है कि चौरासी…

जातीय आरक्षण की आग में देश को जलने से बचाईए

आरक्षण खत्म करने का सिर्फ़ एक ही रास्ता है सभी उपक्रमों और सेवाओं का निजीकरण । देखिएगा तब देश के विकास की रफ़्तार चीन से भी तेज हो जाएगी । लिख कर रख लीजिए । बस एक ध्यान सर्वदा रखना पड़ेगा कि…

अब आरक्षण बन गया है प्रतिभा पलायन का बड़ा कारण

देश और देश की सेवाएं प्रतिभावान बच्चों से वंचित हो रही हैं तो आरक्षण की बला से । देश प्रतिभाहीन लोगों के कचरे से पटा जा रहा है । ऐसे जैसे प्लास्टिक का कचरा हो । प्रतिभा पलायन अब एक नासूर बन…

हिंदू-मुसलमान का आइस-पाइस , आरक्षण की मलाई और चुनाव के मायने

संविधान की आड़ में , संविधान को बचाने का शोर भी यही नफ़रती तत्व सब से ज़्यादा करते हैं। संविधान तोड़ते रहते हैं , संविधान बचाने का टोटका करते रहते हैं। वह चाहते तो शरिया मुस्लिम पर्सनल लॉ ही हैं…