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आरक्षण

अगर लालू और राबड़ी के लड़के नहीं पढ़ पाए तो क्या इसमें ब्राह्मणों का दोष है ?

Positive India:Rajkamal Goswami: आरक्षण के पीछे तर्क दिया गया था कि इतिहास में असमानता पूर्ण व्यवहार के कारण जो वर्ग पीछे रह गये हैं उन्हें समाज की मुख्य धारा में बराबरी पर लाया जा सके ।…

आरक्षण और वोट की ठगी करते घी और चीनी वाले

उन को आरक्षण चाहिए , इन को वोट । दोनों न सिर्फ़ एक दूसरे को ठग रहे हैं बल्कि देश को भी ठग रहे हैं । देश को बरबादी के मुहाने पर ला कर खड़ा कर दिया है इस आरक्षण और वोट के ठगबंधन ने ।

फिर हंड्रेड परसेंट आरक्षण और हंड्रेड परसेंट सेक्यूलरिज्म

आज़ादी की लड़ाई में डाक्टर भीमराव आंबेडकर और मोहम्मद अली जिन्ना के कभी जेल जाने , अंग्रेज पुलिस की लाठी खाने आदि-इत्यादि के कोई विवरण की जानकारी अगर किसी के पास हों तो ज़रुर साझा करे । जिन्ना…

जानिए कैसे आरक्षण की बैसाखी पर खड़े लोगों ने मलाई चाटने के लिए एकलव्य का फर्जी अंगूठा…

एकलव्य कोई दबा-कुचला निर्धन नहीं था । श्रृंगबेर राज्य का शासक था । लेकिन अंगूठे का छल का व्याकरण रच कर आरक्षण की मलाई चाटनी ज़रुर एक छल है । इस छल और कुप्रचार को समाप्त किया जाना चाहिए ।

क्या अब आरक्षण बन गया है प्रतिभा पलायन का बड़ा कारण ?

देश और देश की सेवाएं प्रतिभावान बच्चों से वंचित हो रही हैं तो आरक्षण की बला से । देश प्रतिभाहीन लोगों के कचरे से पटा जा रहा है । ऐसे जैसे प्लास्टिक का कचरा हो । प्रतिभा पलायन अब एक नासूर बन…

लड़की हूं , लड़ सकती हूं ! स्लोगन में संभावनाएं बहुत हैं लेकिन

लड़की हूं , लड़ सकती हूं। बिलकुल खिला-खिला स्लोगन। एकदम चटक और अपीलिंग। किसी ख़ूबसूरत कविता की तरह। किसी वामपंथी सांस्कृतिक दल के नुक्कड़ गीत की थिरकन मन में हिलोर मारने लगती है। लेकिन इस स्लोगन…

तथाकथित सेक्यूलर सूरमाओं तथा जनसंघ का विश्लेषण

जितने भी अपने को दलित बुद्धिजीवी मानते हैं, सब के सब हिप्पोक्रेट हैं। इन की कोई भी लड़ाई और लफ्फाजी दलितों के लिए नहीं , आरक्षण और सुविधा की मलाई चाटने के लिए ही होती है। जातीय नफ़रत और जहर की…

कुछ लोग साहित्य में भी आरक्षण की ही तलब रखते हैं

जो लोग साहित्य में भी आरक्षण की ही तलब रखते हैं, उन से कोई विमर्श करना दीवार में सिर मारना होता है । पिछड़ों , दलितों के साहित्य में भी आरक्षण की तलब भी गज़ब है ।