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Politics
स्वच्छ भारत आंदोलन के स्वर्णिम दौर में हम कूड़ाप्रधान देश क्यों बन रहे हैं?
कुकुर भी जिस स्थान पर बैठता है, उसे पूँछ से बुहार देता है। फिर मनुज ही कूड़े का कुबेर क्यों बन बैठा है?
आधुनिक इस्राइल का जन्म भारतीय सैनिकों की हैफ़ा विजय से ही हुआ है
Positive India:Rajkamal Goswami:
प्रथम विश्व युद्ध से पहले समूचा मध्यपूर्व जिसमें ईराक़ सीरिया जॉर्डन लेबनान सब शामिल था तुर्की के उस्मानी ख़िलाफ़त का अंग था । वही ख़लाफ़त जिसकी सुरक्षा के…
गाजा पट्टी के नागरिकों से एक पैसे की सहानुभूति भी नहीं है
गाजा पट्टी के नागरिकों से एक पैसे की सहानुभूति भी नहीं है। इस लिए कि अगर वह सभ्य शहरी होते तो अपने आंगन में आतंकी हमास को फूलने-फलने नहीं देते। आतंक और आतंकी के किसी भी समर्थक से कभी भी किसी…
पशु-पक्षी कैसे मरते हैं और मरने के बाद उनका क्या होता है?
पक्षियों का भरपूर नींद नहीं लेना मुझे करुणा से भरता है। मछली आँखें खोलकर इसलिए सोती है, क्योंकि उसकी पलकें नहीं होतीं। साँप की भी नहीं होतीं। पक्षियों की आँख पर एक झीनी-सी झिल्ली ज़रूर होती…
सिनेमाई संसार में पराजित प्रेम कहानियों की सर्वश्रेष्ठ नायिका कौन? रेखा! रेखा और केवल…
प्रेम बूढ़ा नहीं होता कभी! रेखा कभी बूढ़ी नहीं होंगी। यूँ ही गुजर जाएंगी, कातिक की रात में रजनीगन्धा की गंध लिए निकले किसी झोंके की तरह... यही उनकी नियति है...
भारत जैसा सेक्यूलर दोगलों का देश नहीं है इजराइल
आतंक , और आतंकी के साथ नो सहानुभूति। अबकी हमास का कोई नामो-निशान नहीं रहेगा। क्यों कि इजराइल , भारत नहीं है। न ही भारत जैसा सेक्यूलर दोगलों का देश है।
हमास ने इस्राइल से युद्धविराम और वार्ता की क्यों पेशकश की?
रह गया हमास अकेला । अभी तो दो दिन भी नहीं हुए इस्राइल का ग़ुस्सा तो इतनी जल्दी ठंडा होने वाला नहीं है । वह तो ग़ाज़ा का नामोनिशान मिटाने का संकल्प लेकर युद्धरत है । वैसे भी हमास सुन्नी है और…
इज़रायल दुनिया का इकलौता यहूदी-राष्ट्र है!
भाईजान, ये ईमान वाली बात तो नहीं है!
हमास की सीमित सफलता भी भारत के लिए एक सबक़ क्यों है?
भारत लाख आर्थिक प्रगति कर ले पाकिस्तान का बच्चा बच्चा भारत और हिंदुओं के प्रति नफ़रत के साथ ही पलता बढ़ता है । उसके अंदर भारत के साथ स्पर्धा का नहीं बल्कि ईर्ष्या का भाव है । ग़ज़वा ए हिंद…
हमास – इजरायल युद्ध को लेकर भारतीय मुसलमानों की दुविधा बड़ी विचित्र क्यों है?
हिन्दुस्तान में मुसलमान का यह तर्क है कि अतीत को भूल जाओ और इज़रायल में यह तर्क है कि अतीत को कभी भूलने न देंगे, यह कैसे चलेगा, बिरादर?