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सचिन के ट्वीट पर लिबरल ब्रिगेड में एक बार फिर खलबली क्यों मच गई?
सचिन तेंदुलकर जब आतंक स्पॉन्सर्ड कंट्री पाकिस्तान के साथ गले में गले मिलकर क्रिकेट खेल रहे थे, तब वह क्रिकेट के भगवान थे। लेकिन जैसे ही उन्होंने राष्ट्रीय हित के मुद्दे पर स्टैंड लेना शुरू…
गाय को दयाधर्म की मूर्तमंत कविता क्यों कहा जाता है?
"गाय का अर्थ मैं मनुष्य के नीचे की सारी गूँगी दुनिया करता हूँ। इसमें गाय के बहाने इस तत्त्व के द्वारा मनुष्य को सम्पूर्ण चेतन-सृष्टि के साथ आत्मीयता का अनुभव कराने का प्रयत्न है। गाय दयाधर्म…
हिंदी फ़िल्मों की खाद है, खनक और संजीवनी भी है खलनायकी
जिधर देखिए गब्बर सिंह की धूम। यह पहली बार हो रहा था कि किसी खलनायक के डायलाग जनता सुन रही थी। और कैसेट कंपनियां गाने के बजाय डायलाग की सी.डी. बाज़ार में उतार रही थीं। गब्बर के डायलाग। गब्बर…
लव जेहाद ही नहीं , , किसी भी जेहाद से मुक्ति पाने के लिए फ़्रांस मॉडल पूरी दुनिया के…
सेक्यूलरिज्म की नकाब उतार कर फेंक दीजिए। अपना स्वाभिमान , अपनी जान , अपनी बेटियों को बचाइए। जैसे सती प्रथा से मुक्ति पाई थी , भारतीय समाज ने , जैसे विधवा विवाह होने लगे हैं। जैसे तमाम और…
बिहार में उद्योग क्यों नहीं है? बिहारी बाहर क्यों जाते हैं?
अनिल अग्रवाल जी को नमन है। हम बिहारियों को अनपढ़, गँवार, असभ्य, कुरूप, श्रमिक आदि मान कर, ‘बिहारी’ पुकार कर गाली देने वालों के लिए यह कई उदाहरणों में से एक है। यदि अनपढ़ और गँवार बिहारी का…
सोनिया गांधी को किसने रोका था प्रधानमंत्री बनने से ?
हर जुमे को मुसलमानों को यह दुआ करनी होती है कि या अल्लाह इस्लाम को काफिरों पर ग़ालिब कर दे । मुसलमानों का बोलबाला कर दे।
हर वर्ष रावण का पुतला जलाने की क्या आवश्यकता है?
बिल्कुल आवश्यकता है। बल्कि यह आवश्यकता सदैव रहेगी। क्या अब भेष बदल कर लड़कियों के साथ छल करने वाले रावण नहीं है धरती पर? गृहस्थों की गृहस्थी तबाह करने वाली सूर्पनखाएँ नहीं क्या? सज्जन दिखने…
क्या ग़ज़वा ए हिंद का एजेंडा उनकी हदीसों में दर्ज है कि हो कर रहेगा?
क्या हम सिर्फ़ ज़ोर देखने के लिये बने हैं बाज़ू ए क़ातिल का !
Bharat National Cyber Security Exercise 2023 Concludes
Bharat NCX 2023 represents a defining moment in India's unwavering commitment to cybersecurity excellence, underscoring the paramount importance of collaboration and knowledge-sharing among…
भूलने के लिए बने ही नहीं संजीव कुमार
सचमुच संजीव कुमार का अभिनय वही सागर सरीखा था, जिस में कई सारी नदियां आ कर मिल जाती हैं।