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Editorial
आजके संसद अटैक ने क्यों याद दिला दिया 13 दिसंबर 2001 का वो काला दिन जब संसद पर हुआ था…
अफ़ज़ल की फाँसी से भारत में भारतीयों का ही एक वर्ग इतना आहत हुआ कि यह नारा भी गूँजा कि, "अफजल हम शर्मिंदा हैं", यह भारत का ही दुर्भाग्य है...!!
गुरुकुल महिला महाविद्यालय में अंतर कक्षीय नृत्य प्रतियोगिता
पॉजिटिव इंडिया :रायपुर
गुरुकुल महिला महाविद्यालय में अंतर कक्षीय प्रतियोगिता के अंतर्गत आज दिनांक 9/12/2023 को युगल एवं समूह नृत्य प्रतियोगिता का आयोजन रंग मंदिर में किया गया इस…
मस्जिद में क्यों सोते थे तुलसीदास ?
"माँग के खाइबो मसीत में सोइबो।" एक शांति प्रिय और राम को गाने वाला व्यक्ति इस से ज़्यादा और कैसे लिख कर बता सकता था ?
अपनी नयी पीढ़ियों को खुले शब्दों में बताइए कि हमने अपने हाथों से बाबरी मस्जिद को…
अपनी नयी पीढ़ियों को खुले शब्दों में बताइए कि हमने अपने हाथों से बाबरी मस्जिद को ढहाया है। भौतिक रूप से उस क्रांति में भले शामिल न थे, लेकिन मानसिक रूप से अवश्य थे। पूरा हिंदू समाज था। देश…
26/11 हमले की एक ऐसी नायिका जिसके शौर्य को समय के साथ भुला दिया गया
एक साधारण नर्स में उस दिन दिव्य शक्ति प्रविष्ट कर गयी थी। हाथ मे औज़ार लिये अंजली आतंकवादियों का सामना करने को भी तैयार खड़ी थी। हर साल 26/11 के नायकों को स्मरण करता हर हिंदुस्तानी अंजली के…
कल और आज, प्रधानमंत्री मोदी के दो दिनों की भाव भंगिमा कुछ अलग ही क्यों है?
आज शीतकालीन सत्र शुरू होने से पहले मोदी जी ने मीडिया संबोधन किया। इस संबोधन में भी उन्होंने कोई राजनीतिक सत्ता के नेता की तरह बयान नहीं दिया। बल्कि उन्होंने नसीहत दी कि सदन में विरोधी पक्ष…
“ब्राह्मण और बनियों भारत छोड़ो “ जेएनयू का नया नारा है क्या?
ब्राह्मण बनिया भारत छोड़ो ! नारा भी उसी गति को प्राप्त हो जाएगा जिसको बसपा का यह नारा उपलब्ध हुआ,
तिलक तराज़ू और तलवार
इनको मारो जूते चार
छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश तथा राजस्थान में भाजपा की जीत से अधिक तुष्टिकरण की हार क्यों…
आज के रिजल्ट को मैं भाजपा की जीत से अधिक तुष्टिकरण की हार मानता हूं। हार उस विचारधारा की, जो बहुसंख्यक भावनाओं को अपने जूते की नोक से दबा कर रखना चाहती है। यह हार उस मानसिकता की है जो चुनाव…
अशोक गहलोत के खतरनाक चुंगल से राजस्थान की जनता ने राजस्थान को बाहर निकाल लिया!!
हिंदुओं के प्रति पाकिस्तान सा व्यवहार करने वाली अशोक गहलोत की राजस्थान सरकार, कन्हैया लाल के खून के छींटे से बिल्कुल बेफिक्र थी।
पनौती की पनही
अपनी बदजुबानी के जुर्म में पनौती की पनही खाने के लिए अभिशप्त है कांग्रेस। पनही मतलब , जूता। तो इस पनही से मुक्ति के लिए अव्वल तो कांग्रेस को अपने सभी प्रवक्ताओं को बर्खास्त कर देना चाहिए।