Browsing Category
Editorial
गाँधी ने किसी को अंग्रेजों के विरूद्ध सशस्त्र क्रांति करने से रोका था क्या?
निस्संदेह देश की आज़ादी में लाखों करोड़ों लोगों का सहयोग रहा लेकिन श्रेय लीडर को ही मिलता है । वह लोगों के पुरुषार्थ को सही दिशा में ले जाता है । गाँधी के सत्याग्रह को अपना कर ही मार्टिन…
इस एंटी मोदी स्क्वॉड के क्या कहने !
एंटी मोदी स्क्वॉड की एक और तकलीफ़ अभी सामने आई है चुनाव प्रचार ख़त्म होने के बाद कन्याकुमारी में विवेकानंद मेमोरियल में मोदी के ध्यान की। एंटी मोदी स्क्वॉड के कबीले के सारे सूबेदार एक सुर में…
इस्राइल हमास की तब तक पिटाई करेगा जब तक हमास का नामोनिशान नहीं मिट जाता
इतने सारे इस्लामी मुल्क क्यों हमास की पिटाई चुपचाप देख रहे हैं ? और तो और मिस्र और जॉर्डन जैसे पड़ोसी मुल्कों ने तो ग़ाज़ा के शरणार्थियों को लेने से भी साफ़ इन्कार कर दिया । अगर संभव होता तो…
क्या होता यदि सुभाष चंद्र बोस भारत में जीवित लौट आते?
Positive India:Rajkamal Goswami:
सन ४५ में विश्वयुद्ध समाप्त होने के बाद आज़ाद हिंद फ़ौज के बहुत से सैनिक भारत वापस आ गये । साधारण सैनिकों को तो अंग्रेजों ने कुछ नहीं कहा और वे चुपचाप अपने…
छत्तीसगढ़ में नक्सल मोर्चे पर अंतिम लड़ाई, क्या बस्तर में रुक पाएगी हिंसा?
यह बहुत स्पष्ट है कि केंद्र व राज्य सरकार ने नक्सलवाद व नक्सलियों के खात्मे का पक्का बंदोबस्त कर लिया है।
यह पुरुष प्रधान समाज स्त्रियों के लिए तेज़ाब की नदी है
स्त्रियों को अपना अस्तित्व , अपनी आज़ादी , अपना स्वाभिमान खुद तय करना होगा । स्त्री अभी भी पुरुष के बिना पतवार की नाव समझी जाती है । यह देवी रूप आदि भी बेमतलब का दिखावा है । यत्र नार्यस्तु…
संविधान तो बदलेगा और उस में सरकार जेल से नहीं चलाने की बात लिखी जाएगी
जो आदमी कश्मीर का कोढ़ 370 हटा सकता है , कश्मीर को फिर से ज़न्नत बना सकता है। देश को आतंक मुक्त बना सकता है। अयोध्या में सकुशल राम मंदिर बनवा सकता है। विकास की चांदनी में देश को नहला सकता है…
चीन की दीवार से भी विकट
Positive India: Dayanand Pandey:
यह जो नरेंद्र मोदी नाम की दीवार है न , चीन की दीवार से भी विकट है। लेकिन कुछ लोग इस दीवार से सिर टकराने के लिए अभिशप्त हो चुके हैं। देखते चलिए। आनंद मिलेगा।…
शिवाजी महाराज की मृत्यु के बाद मराठा साम्राज्य की बढ़ती सीमाएं अचानक सिकुड़ने क्यों लगी…
Positive India: Sarvesh Kumar Tiwari:
सन 1680 ई में शिवाजी महाराज की मृत्यु के बाद मराठा साम्राज्य की बढ़ती सीमाएं अचानक सिकुड़ने लगी थीं। ऐसा अनायास ही नहीं था, उस महान चामत्कारिक व्यक्तित्व…
किंतु कुछ भी कर लें बिल्लियों को खंभा नोचने से नहीं रोका जा सकता है ।
अगर चुनाव सुधार ही करने हैं तो इस बार ऐसी मशीन लगानी चाहिये जो मतदान समाप्त होते ही ऑनलाइन रिजल्ट घोषित कर दे ।