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Editorial

सुस्वाद भोजन पर भारत का योगदान अमूल्य क्यो है ?

भारतीयों को ख़ाना पकाने और ख़ाने का सलीका सिखाने वाले आज भी न तो इडली सांभर दोसा वड़ा बना सकते हैं न बंगाल की प्रसिद्ध इलिश सरसों बाटा न उडुपी की शाकाहारी थाली न राजस्थानी कढ़ी । अरे इतने…

ओवैसी ने क्यों कहा कि अल्लाह अपनी ताकत से तुम्हें नेस्तनाबूद करेगा ?

ओवैसी ने निजाम-ए-मुस्तफा याद कराया है। कहा है, "अल्लाह अपनी ताकत से तुम्हें नेस्तनाबूद करेगा।" मतलब फिलहाल योगी-मोदी के रहते अल्लाह की ताकत भी मुकाबला नहीं कर सकती।

कानपुर में डेढ़ सौ करोड़ रुपए की इत्र से क्या उखड़ी टाइल और टोटी की भी गंध आएगी ?

टोटी यादव ने तब टाइल नहीं उखड़वाई थी , नीचे गड़ी इत्र की यह गड्डियां निकलवाई थीं। नहीं दुनिया में ऐसा कौन टाइल है , जो उखाड़ने के बाद भी लग जाता है। यह नक़दी हज़ारो करोड़ की थी।

इतनी खामोशी क्यों है भाई ?

अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में हत्या हुए 72 घंटे बीत चुके हैं। इसके बाद कपूरथला के गुरुद्वारे में हुई एक और हत्या को 48 घंटे बीत चुके हैं। दोनों हत्याकांड दर्जनों सीसीटीवी कैमरों और सैकड़ों की…

लाल किले पर मालिकाना हक का नैरेटिव क्यो हुआ ख़ारिज?

लाल किला में उपस्थित केसर कुंड द्वार पर हाथी की मूर्तियां, वाराह की मूर्तियां कब से इस्लामिक शैली हो गई? तमाम और भी ऐसे चीजों पर दरबारी इतिहासकारों ने कुछ नहीं कहा है।

काशी विश्वनाथ की भव्यता देख नौशाद क्यों रो पड़ा?

हमारा धर्म स्थल तोड़कर उस पर गुंबद लगाकर तहजीब का स्टीकर कोई आतताई औरंगजेब आकर चिपका दे, तब वह बहुत खुश रहता है। लेकिन उस गुंबद को हम छुए भी ना और अलग से ही अपने सांस्कृतिक विरासत को भव्य…

अगर हिंदुओं की सत्तर साल की उदारता को आपने कमजोरी न समझा होता तो हिंदू पुनर्जागरण का…

काशी विश्वनाथ मंदिर की भव्यता के सामने ज्ञानवापी मस्जिद की रौनक कम हो जाने के कारण नौशाद आलम बुक्का फाड़ कर क्यों रो रहे हैं ?

मुगलों की बहादुरी का वो काला सच जिसकी खेती वामपंथी इतिहासकार करते आ रहे हैं

मुगलों की तथाकथित "बहादुरी की अफीम" की खेती कांग्रेसी जमीन पर वामपंथी इतिहासकारों ने जमकर की। पाकिस्तान उस अफीम को आजतक चाट भी रहा है, बेच भी रहा है। भारत में भी कट्टर धर्मांध मूर्खों की…

बनारस के हुस्न को ग़ालिब की नज़र से क्यों देखें?

ग़ालिब कहते हैं, बनारस शंख-नवाज़ों का मंदिर है, हम हिन्दुस्तानियों का का’बा है इबादत-ख़ाना-ए-नाक़ूसियानस्त, हमाना काबा ए हिन्दूस्तानस्त।

अमर्त्य सेन पूरे देश के सामने क्यों नंगे हो गए ?

अमर्त्य सेन तुम दरअसल अर्थशास्त्री की नकाब में मंडरा रहे वह गद्दार हो जिसे 370 हटाने की कार्रवाई आपत्तिजनक लगती है। यासीन मलिक, गिलानी की गिरफ्तारी तुम्हे अच्छी नहीं लगती। तुम देश के वो…