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Editorial
उल्लू को कबूतर कैसे कह दूं ?
स्वामी प्रसाद मौर्य को राजनीतिक मौसम विज्ञानी कह कर उत्तरप्रदेश में सपा की सरकार बनने का ढपोरशंख बजाने में जुट गए न्यूजचैनलों के ढपोरशंखी एंकर एडिटर रिपोर्टरों को क्या कहा जाए.?
क्या अब आएगा ऊंट पहाड़ के नीचे ?
मोदी को विक्रमादित्य बनाकर वेताल की तरह उनकी पीठ पर लदकर अभीतक चुनावी महाभारत जीतती रही भाजपाई सफेद हाथियों की फौज की बहुत कड़ी परीक्षा इसबार का चुनाव लेने जा रहा है।
लेकिन मोदी की जगह राहुल गांधी को हरगिज नहीं चुन सकते
कोरोना और दुनिया की हालत देखते हुए भारत की अर्थव्यवस्था इतनी बुरी भी नहीं है। 80 करोड़ लोगों को दो साल से मुफ्त राशन आदि के मद्देनज़र अर्थव्यवस्था ठीक है। फिर एक फाइनल बात यह कि मोदी ने…
प्रधानमंत्री मोदी ने साहिबजादा जोरावर सिंह जी और साहिबजादा फतेह सिंह जी की शहादत की…
'वीर बाल दिवस' उस दिन मनाया जायेगा, जिस दिन साहिबजादा जोरावर सिंह जी और साहिबजादा फतेह सिंह जी एक दीवार में जिंदा चुनवाये जाने के कारण शहीद हुए थे। इन दोनों महान बालकों ने धर्म के नेक…
मेरे देश ने अपना नायक चुनना कैसे सीख लिया ?
एफएनएफ एसॉल्ट राइफल उस कमांडो की पहचान है। जिसके ऊपर रखी हाथों की तर्जनी सिर्फ राइफल के ट्रिगर से 1 इंच दूर, जो उसके कार्य के प्रति उसकी प्रतिबद्धता बताता है। उसकी नजरों में हमारे युवाओं को…
मोदी नाम का एक दीमक कांग्रेस को चाट कर कैसे खत्म किए जा रहा है?
प्रधान मंत्री का काफिला रोका गया पंजाब में ऐन पाकिस्तानी सरहद पर। और बताया जा रहा है कि यह पंजाबियत है।
कश्मीर के लिए कड़क नरेंद्र मोदी पंजाब के लिए मुसलसल मज़बूरी का नाम महात्मा गांधी पर…
योगी जी की तस्वीर के साथ टेरर शब्द शीर्षक का भारत ने क्यों बहिष्कार कर दिया ?
टेरर शब्द लिखने वालों ने बड़ी सोच समझकर वो तस्वीर छापी। आंखों से जैसे अंगारे निकल रहे हों। अंगारों की दहक में जैसे कोई सामने पड़े तो जलकर राख हो जाए। आंखों में इसी दहक को कारवां ने टेरर के…
वामपंथी मीडिया भारत के टीकाकरण के बारे में भ्रामक प्रचार क्यों कर रहा है?
भारत में 11 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने पहले ही टीकाकरण के दौरान पहली खुराक का शत प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त कर लिया है, जबकि 3 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने अब तक कोविड-19 के खिलाफ 100%…
डिजाइनर नैरेटिव में बदलते सवालों पर ध्यान देने की क्यों आवश्यकता है?
पीयूष जैन पुष्पराज जैन का ही साला है। यह भी मान लिया जाए यदि की गलती से अपने ही कारोबारी पर सरकार ने रेड डलवाया तो कम से कम अपने कहे पर कायम तो है कि "ना खाएंगे, ना खाने देंगे"।
अखिलेश से बौखलेश होते जाने की यातना
अखिलेश पर सब से बड़ा इल्जाम पिता मुलायम की पीठ में छुरा घोंपने का है। लोग कहते ही रहते हैं कि जो अपने बाप का नहीं हुआ , वह किसी का नहीं हो सकता । लोग औरंगज़ेब से उन की तुलना करते हुए ,…