Browsing Category
Editorial
नेशन नहीं यूनियन आफ स्टेट का एक्सटेंशन और शाहीनबाग़ की वापसी क्यों है यह हिजाब की…
मुट्ठी भर वोट के लिए , शाहीनबाग़ की नई दुकान के लिए , कठमुल्लों ने हिजाब के पक्ष में जंग छेड़ दी है।
और श्वान प्रवृत्ति के सेक्यूलर चैंपियंस ने इन कठमुल्लों का मन बढ़ाने के लिए इन की…
प्रधानमंत्री मोदी ने राहुल गांधी के सारे भाषण को कैसे मिट्टी में मिला दिया?
पूछ लिया मोदी ने कि नेशन से अगर इतनी ही आपत्ति है तो पार्टी का इंडियन नेशनल कांग्रेस क्यों रखा है। बदल दीजिए पार्टी का नाम?
लता मंगेशकर से घृणा और नफ़रत करने वाले कौन है ये लोग ?
ये बहुत बीमार लोग हैं। वैचारिकी के कोढ़ में कुढ़ते हुए सड़ गए हैं। वैचारिकी के खूंटे में बंधे तेली के बैल हैं। भेड़ चाल के अभ्यस्त लोग हैं। इन को डर है कि अगर लता मंगेशकर के प्रति अपनी घृणा नहीं…
लता जी केवल एक कलाकार मात्र नहीं थी बल्कि स्वतंत्र भारत मे महिला सशक्तिकरण की…
लता जी को केवल 2 चीजों से प्यार था, एक संगीत और दूसरा राष्ट्र। वो हमेशा कहती थीं कि भारत के झंडे को मैं सबसे ऊंचा देखना चाहती हूं।
शाहरुख खान ने लता मंगेशकर की श्रद्धांजलि सभा में क्यों थूका ?
शाहरुख खान अब हम पूछने लगे हैं कि हमारी श्रद्धांजलि सभा में तुमने थूका क्यों? अगर दुआ ही फूंका तो पहले ये बताओ, क्या तुम्हारे हिसाब से कोई काफिर जन्नत जा सकता है?
लता मंगेशकर के प्रेम और उन के प्रेम की विराट दुनिया
लता मंगेशकर ने सिर्फ़ प्रेम गीत ही नहीं गाए। प्रेम भी किए। कई प्रेम किए। पर सफलता कहिए , सिद्धि कहिए , एक में भी नहीं मिली।
पर पृथ्वी पर दुबारा जन्म नहीं लेना चाहती : लता मंगेशकर
भारत रत्न लता मंगेशकर जी को विनम्र श्रद्धांजलि स्वरूप 1995 में दयानंद पांडे जी द्वारा लिया गया एक्सक्लूसिव इंटरव्यू ।
रामानुजाचार्य के स्टैचू आफ इक्वलिटी के निर्माण के लिए समाज प्रधानमंत्री मोदी का ऋणी…
अद्वैत को सुगम बनाने के लिए भक्ति मार्ग का चयन ही श्री रामानुजाचार्य के लिए विशिष्टाद्वैत है। आज हमारे प्रधानमंत्री ने समाज के परमार्थिक कल्याण हेतु समता के इसी अवधारणा का उपयोग कर स्टैचू आफ…
क्या राहुल गांधी ने संसद में बहुत बुद्धिमानी की बात की ?
संघ होते हुए भी भारत कोई सोवियत संघ नहीं कि टूट जाएगा। भारत में विविधता से बनने वाली राष्ट्र भावना की एकता को शायद कोई विदेशी रक्त चरित्र नहीं परख सकता। किताबें पढ़कर कम्युनिज्म प्राप्त कर…
हिमानता बिसवा सरमा के इंडिया बिलॉन्ग्स टू हिन्दू कहने पर पूरा हॉल तालियों की…
अगर अंग्रेजों के आने से पहले भारत का कोई कंसेप्ट नहीं था तो फिर महाभारत क्या था?