Author
positive india
Positive India (www.positiveindia.net.in)has been started in the year 2012 at Raipur by Purshottam Mishra of Chhattisgarh-India. Positive India is offline weekly newspaper and www.positiveindia.net.in is online daily newsportal.Positive India is very active on social media platforms.
आप अपने राज्य का भविष्य अर्थात कल कैसा चाहते हैं? घर से निकले और वोट करें
अपने राज्य का भविष्य अर्थात कल कैसा चाहते हैं...?
वही घपले,घोटाले और मुस्लिम तुष्टीकरण वाला या फिर विकासशील,सुरक्षित और हिंदुत्व की विचारधारा से ओत प्रोत!!
नेहरू का इतना विरोध क्यों है ?
नेहरू न होते तो इंदिरा राजीव और राहुल भी न होते । देश को बहुत सारी समस्याओं से छुटकारा मिल जाता । गुट निरपेक्षता की नीति भी न होती । या तो भारत अमेरिकी गुट में शामिल हो कर इस्राइल बन गया…
साम्यवादी आक्रमण से बचना हमारे देश का सौभाग्य क्यों है?
साम्यवादी आक्रमण इतना सुनियोजित, इतना शातिर और इतना शक्तिशाली था कि आज भी हम उसके थपेड़ों को झेलते हैं।।
100 साल के इस आक्रमण ने हिन्दुओं को सर्वथा बेहोश, विवेकशून्य और हीनभावना से ग्रस्त…
Why Kishtwar Is Emerging as North India’s Major Power Hub?
Positive India:New Delhi:
Union Minister of State (Independent Charge) Science & Technology; MoS PMO, Personnel, Public Grievances, Pensions, Department of Atomic Energy &…
प्रधानमंत्री ने अयोध्या दीपोत्सव की ऊर्जा को नमन किया
Positive India: New Delhi:
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज कहा कि अयोध्या दीपोत्सव की ऊर्जा देश में नई उमंग का संचार करेगी। उन्होंने कामना की कि भगवान श्री राम समस्त देशवासियों का…
PM Modi Celebrates Diwali With Brave Jawans In Lepcha
Modi, “The place where jawans are posted is not less than any temple for me. Wherever you are, my festival is there”
मन बांधने की वस्तु क्यों है ?
"ईश्वर ने आदमी की सीमा उसके शरीर से बांध दी, नाहक़ दौड़धूप करके हम दु:ख को ही न्योतते हैं।"
“युवा” के सदस्यों ने दीपावली मिलन कार्यक्रम का किया सफल आयोजन
Positive India:Raipur:
युवाओं को निशुल्क कोचिंग देने वाली संस्था "युवा" के सदस्यों ने दीपावली मिलन कार्यक्रम का किया सफल आयोजन किया।
सेंट्रल जीएसटी आयुक्तालय, रायपुर में आयोजित दिवाली मिलन…
सावरकर की समकक्षता में, राजनीतिक फलक पर न गांधी आते हैं न नेहरू
गांधी की सफलता और गांधी का पाखंड, कांग्रेस की गांधी पर निर्भरता और कांग्रेस का पाखंड। इस टुच्चेपन की तुलना सावरकर के गौरवशाली जीवन से करते हुए सावरकर को तुच्छ बना कर पेश करने की राजनीति पर…