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जितिन प्रसाद के भाजपा प्रवेश के चौंकाने वाले तथ्य

कब तक चलेगा न्यूज़ चैनलों का ब्राह्मण... ब्राह्मण... ब्राह्मण... का हुड़दंग?

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Positive India:Satish Chandra Mishra:
प्रधानमंत्री मोदी की INDIA FIRST और टीम इंडिया की कसौटी से अनजान लोग ही कर रहे हैं ब्राह्मण… ब्राह्मण… ब्राह्मण… का हुड़दंग।
कल दोपहर से देर रात तक आपने लगभग हर न्यूजचैनल के एंकरों एडीटरों विश्लेषकों को एक ही राग अलापते हुए देखा सुना होगा। क्षुद्र जातीयता के अंधे राजनीतिक कुएं की सीमित संकुचित सीमाओं में मेंढकों की तरह उछलते कूदते उनके आकलनों अनुमानों और विश्लेषणों की धुन पर कांग्रेस समेत हर विपक्षी दल के नेताओं प्रवक्ताओं को बेसुध होकर नाचते झूमते हुए भी आपने देखा सुना होगा।
ये सब के सब एक स्वर से एक सुर में यही राग अलाप रहे हैं कि भाजपा में जितिन प्रसाद को ब्राह्मण नेता के रूप में शामिल किया गया है। उनका यह जातीय राग अभी और कई दिन तक जारी रहेगा।
यह राग अनर्गल और अर्थहीन क्यों है इसकीं चर्चा करने से पहले यह जान लीजिए कि जितिन प्रसाद के भाजपा में आने का कारण क्या है। इस संदर्भ में चौंकाने वाला तथ्य यह भी जान लीजिए कि जितिन प्रसाद का चयन किसी और के बजाए स्वयं प्रधानमंत्री मोदी की सहमति के पश्चात ही किया गया। 2019 में भी प्रधानमंत्री की ही इच्छा थी कि जितिन प्रसाद को भाजपा में लाया जाए। लेकिन उनकी इच्छा का किसी जातीय चुनावी समीकरण से ना तब कोई लेना देना था, ना आज कोई लेनादेना है।
2019 में पार्टी से अपने भावनात्मक लगाव, बहुत पुराने सम्बंधों व उनके कुछ महत्वपूर्ण सुझाव मानने के राहुल गांधी के उन वायदों के कारण जितिन प्रसाद ने पार्टी छोड़ने का अपना फैसला अंतिम क्षणों में बदल दिया था। यह अलग बात है कि उनसे किए गए संगठन संबंधित वायदे राहुल गांधी ने पूरे नहीं किए।
अब बात मुद्दे की…
सम्भवतः बहुत कम लोगों को या यूं कहिए कि चुटकी भर लोगों को यह ज्ञात होगा कि प्रधानमंत्री द्वारा लागू की गयी जिस उज्ज्वला योजना को पूरे देश में अभूतपूर्व सफलता और लोकप्रियता मिली वह उज्ज्वला योजना किसी और की नहीं बल्कि जितिन प्रसाद का ही ब्रेन चाइल्ड है। 2010 में तत्कालीन पेट्रोलियम राज्यमंत्री के रूप में उन्होंने यह योजना तैयार कर के उसकी शुरुआत की थी। इसके अलावा SMS के जरिए रसोई गैस सिलेंडर की बुकिंग की योजना तैयार कर जितिन प्रसाद ने तब शुरू किया था जब पेट्रोलियम राज्यमंत्री बनते ही उनका सामना रसोई गैस सिलेंडर की बुकिंग में डीलरों द्वारा की जाने वाली भारी धांधली और भ्रष्टाचार की शिकायतों के अंबार से हुआ था। अतः इसके खात्मे के लिए उन्होंने SMS से रसोई गैस सिलेंडर की बुकिंग करने की कम्प्यूटराइज्ड योजना केवल 4 महीनों में तैयार कर के सितंबर 2009 में उसे लागू कर दिया था। धीरे धीरे उसे विस्तार दिया जाने लगा था। जहां जहां योजना लागू हो रही थी, वहां से डीलरों की धांधली और भ्रष्टाचार का सफाया होता जा रहा था। ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे पेट्रोल पंप और रसोई गैस की छोटी एजेंसियों को खोलने तथा उनका आबंटन दिल्ली में अपनी निगरानी में लॉटरी सिस्टम से करने की शुरूआत भी जितिन प्रसाद ने ही की थी। वह योजना भी इस प्रकार लागू की गयी थी कि पूरी तरह भ्रष्टाचार रहित थी। तत्कालीन यूपीए सरकारों के कर्णधारों को यह रास नहीं आया था। केवल डेढ़ वर्ष बाद जनवरी 2011 में उनसे पेट्रोलियम मंत्रालय लेकर उन्हें दूसरे मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंप दी गयी थी। पेट्रोलियम मंत्रालय से उनके हटने के बाद SMS सेवा कई शहरों में अवश्य चलती रही, लेकिन बहुत आगे नहीं बढ़ सकी। लेकिन पेट्रोलियम मंत्रालय से उनके हटते ही अन्य दोनों योजनाओं ने दम तोड़ दिया। लोग उन योजनाओं को भूल गए। लेकिन एक व्यक्ति ना उन योजनाओं को भूला, ना ही जितिन प्रसाद को। वह व्यक्ति थे, गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी जो यूपीए सरकार की प्रत्येक नीति और योजना पर पैनी निगाह रखते थे। अतः भ्रष्टाचार रहित जनहित का कार्य करने की जितिन प्रसाद की मंशा और कोशिश को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में बहुत करीब से देखने के बाद से ही नरेन्द्र मोदी की INDIA FIRST और टीम इंडिया की उस कसौटी पर जितिन प्रसाद पूरी तरह खरे उतर चुके थे, जिस कसौटी पर खरा उतरने पर प्रधानमंत्री मोदी ने समाज के ऐसे लोगों को राष्ट्रपति भवन बुलाकर देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों, पद्म सम्मानों से सम्मानित करना शुरू किया था जिन्हें कोई नहीं जानता था, जो देश के आम नागरिक थे लेकिन देश के लिए कुछ विशेष कार्य कर रहे थे। पिछले 7 वर्षों से यह परंपरा लगातार जारी है।
जितिन प्रसाद क्योंकि राजनीतिक व्यक्ति हैं अतः प्रधानमंत्री मोदी की उसी कसौटी पर खरा उतरने के पश्चात ही भाजपा ने अपने द्वार उनके लिए खोले और खुले दिल से उनका स्वागत किया है।
पेट्रोलियम मंत्रालय में उनके उपरोक्त कार्यों के अलावा लगभग 22 महीने पहले कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने का भयंकर विरोध कांग्रेस जब संसद से सड़क तक कर रही थी। उस विरोध की कमान खुद राहुल गांधी ने संभाली थी। तब भी जितिन प्रसाद कांग्रेस के अकेले ऐसे नेता थे जिन्होंने अपने साथी, कुछ युवा कांग्रेसी नेताओं के साथ मिलकर जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने का खुलकर समर्थन और स्वागत किया था। हाल ही में सम्पन्न हुए बंगाल विधानसभा में कांग्रेस के चुनाव प्रभारी के रूप में उन्होंने फुरफुरा शरीफ के कट्टर धर्मान्ध मौलाना की शुद्ध रूप से शत प्रतिशत साम्प्रदायिक पार्टी के साथ गठबंधन करने के कांग्रेस हाईकमान के फैसले को खुलकर कटघरे में खड़ा किया था। सत्ता की जोड़ तोड़ के लिए महाराष्ट्र में शिवसेना के साथ गठबंधन का भी जितिन प्रसाद ने पार्टी के भीतर मुखर विरोध किया था। जितिन प्रसाद के यह वो कुछ फैसले हैं जो समय समय पर मीडिया में उजागर होते रहे हैं।
अतः ऐसे राजनेता द्वारा कांग्रेस छोड़ने और भाजपा में शामिल होने के फैसले को केवल जातीय चश्मों से देख जांच परख रहे तथाकथित राजनीतिक विश्लेषकों, एंकरों, एडीटरों की जानकारी की दयनीय दशा पर मुझे तो तरस आ रहा है। आपका क्या विचार है.?
क्योंकि पोस्ट बहुत लंबी हो गयी है इसलिए इसे यहीं विराम दे रहा हूं। लेकिन इसके अगले और अंतिम भाग
“उत्तरप्रदेश में ब्राह्मण राजनीति का चेहरा और जितिन प्रसाद” में आपको न्यूजचैनली भेड़चाल से बिल्कुल अलग, कुछ अत्यन्त रोचक तथ्यों से अवगत कराऊंगा।

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क्योंकि ठोस तथ्यों के बिना मैं कुछ लिखता नहीं हूं।
साभार:सतीश चंद्र मिश्रा-(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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