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यूक्रेन पर हमले के एक साल बाद रूस क्यो फ़्रस्ट्रेटेड हो चुका है ?

-राजकमल गोस्वामी की कलम से-

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Positive India:Rajkamal Goswami:
आज रूस को यूक्रेन पर हमला किए हुए एक साल हो गया । यूक्रेन मोर्चे पर डटा हुआ है और रूस दुनिया भर में अपनी ताक़त की पोल खुल जाने से खिसिया चुका है यानी फ़्रस्ट्रेटेड हो चुका है ।

गामा के सामने ज़ेबिस्को वैसलीन पोत कर कुश्ती लड़ने आया था फिर भी गामा ने अखाड़े की मिट्टी हाथों में लगा कर उसे एक मिनट से भी कम में आसमान दिखा दिया । किसी तरह की कोई बहानेबाज़ी नहीं की । रूस साल भर से ज़ेलिंस्की से जूझ रहा है । भारत और दुनिया भर में फैले रूस समर्थक इसके लिए अमेरिका और नाटो को दोषी ठहरा रहे हैं ।

रूस क्या समझता था कि वह यूक्रेन पर हमला करेगा और यूक्रेन भय के कारण बिना किसी प्रतिरोध के रूस के सामने आत्मसमर्पण कर देगा ? रावण को भी ऐसा ही घमंड था कि इन तपस्वियों में त्रयलोकजयी रावण से युद्ध करने का न साहस होगा न संसाधन । लेकिन राम ने भी सुग्रीव और उसकी सेना का सहयोग लिया ।

यूक्रेन को रूस के शत्रुओं का सहयोग मिल रहा है तो आश्चर्य क्या है । सोवियत युग में भी वह अफ़ग़ानिस्तान में पैदली मात खा चुका है । अब यूक्रेन रूस के गले में फँसी हड्डी बन चुका है । साल भर युद्ध करने में दोनों पक्षों की अर्थव्यवस्था चकनाचूर हो जाती है । हथियार बनाने वाले देशों की चाँदी हो जाती है । तथाकथित महाशक्ति रूस को ईरान तक से ड्रोन ख़रीदने पड़ रहे हैं ।

युद्ध की बरसी पर पुतिन साहब की नज़्र मजाज़ लखनवी की नज़्म आवारा का एक बंद पेश है,

जी में आता है ये मुर्दा चाँद तारे नोच लूँ
इस किनारे नोच लूँ या उस किनारे नोच लूँ
एक दो की बात क्या सारे के सारे नोच लूँ

ऐ ग़मे दिल क्या करूँ ऐ वहशते दिल क्या करूँ

राजकमल गोस्वामी

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