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यू पी में दलित चेतना, मुस्लिम चेतना और यादव चेतना सब पर क्यो भारी रहता आया है?

-दयानंद पांडेय की कलम से-

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Positive India:Dayanand Pandey:
दलित चेतना, यादव चेतना और मुस्लिम चेतना का उत्तर प्रदेश के प्रशासन में बहुत बड़ा असर रहता है। आग मूतने की हद तक। जातीय चेतना और गणित का आलम यह है कि मंत्री तो मंत्री अफ़सरों और कर्मचारियों की नियुक्ति भी जातीय आलोक में ही की जाती है। यहां तक कि मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक जैसे पदों की नियुक्तियां भी जातीय चेतना में डूब कर होती हैं। दलित चेतना, मुस्लिम चेतना और यादव चेतना सब पर भारी रहता आया है बीते ढाई दशक से। अगर बहुजन समाज पार्टी की सरकार होती है तो हर प्राइज और महत्वपूर्ण पोस्ट पर दलित ही दिखेगा। भ्रष्टाचार के सागर में गोता मारता हुआ। अगर समाजवादी पार्टी की सरकार है तो हर प्राइज और महत्वपूर्ण पोस्ट पर यादव जी लोग लुक होंगे। भ्रष्टाचार के भवसागर में आकंठ डूबे हुए। यहां तक कि पुलिस विभाग में तो सारे यादव थानेदार हो ही जाते हैं। गाज़ियाबाद से बलिया तक यही आलम होता है। दलित हों कि यादव, अफ़सर तो अफ़सर, एक क्लर्क तक आग मूते रहता है। कि किसी और वर्ग के व्यक्ति का काम करना क्या सांस तक लेना दूभर रहता है। और इन की आंच में आम जनता को नित अपमानित होना जैसे नियम सा बन गया है। इस जातीय चेतना पर लगाम लगना भी ज़रुरी नहीं है? जाति कोई भी हो उस की अति सर्वदा बुरी होती है। कबीर कह ही गए हैं कि:

अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप
अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप ।

साभार:दयानंद पांडेय-(ये लेखक के अपने विचार है)

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