Editorial कर्ण द्वापर में ही नहीं कलयुग में भी होते हैं कभी कुंती के हिस्से , कभी मुलायम के… positive india May 14, 2026 0 ग़नीमत बस यही थी कि अपर्णा आसाम में थीं। लखनऊ में नहीं। अपर्णा अगर लखनऊ में होतीं तो सपा के लोग उन को फंसाने के लिए , लांछन लगाने के लिए कुछ भी कर गुज़र गए होते।