लमही गांव की मन में टूटती तसवीर और उस की छटपटाहट के बीच प्रेमचंद की जय !
लमही की जो तसवीर टूटी है मन में अभी-अभी, बिलकुल अभी शहर में तब्दील होते जाने की उस की छटपटाती लहूलुहान तसवीर भी मन में संत्रास की एक बडी़ सी चादर बिछा गई है। सरकारीकरण की आंच में वह बदसूरत…