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गाय को दयाधर्म की मूर्तमंत कविता क्यों कहा जाता है?

"गाय का अर्थ मैं मनुष्य के नीचे की सारी गूँगी दुनिया करता हूँ। इसमें गाय के बहाने इस तत्त्व के द्वारा मनुष्य को सम्पूर्ण चेतन-सृष्टि के साथ आत्मीयता का अनुभव कराने का प्रयत्न है। गाय दयाधर्म…

हिंदी फ़िल्मों की खाद है, खनक और संजीवनी भी है खलनायकी

जिधर देखिए गब्बर सिंह की धूम। यह पहली बार हो रहा था कि किसी खलनायक के डायलाग जनता सुन रही थी। और कैसेट कंपनियां गाने के बजाय डायलाग की सी.डी. बाज़ार में उतार रही थीं। गब्बर के डायलाग। गब्बर…

लव जेहाद ही नहीं , , किसी भी जेहाद से मुक्ति पाने के लिए फ़्रांस मॉडल पूरी दुनिया के…

सेक्यूलरिज्म की नकाब उतार कर फेंक दीजिए। अपना स्वाभिमान , अपनी जान , अपनी बेटियों को बचाइए। जैसे सती प्रथा से मुक्ति पाई थी , भारतीय समाज ने , जैसे विधवा विवाह होने लगे हैं। जैसे तमाम और…

बिहार में उद्योग क्यों नहीं है? बिहारी बाहर क्यों जाते हैं?

अनिल अग्रवाल जी को नमन है। हम बिहारियों को अनपढ़, गँवार, असभ्य, कुरूप, श्रमिक आदि मान कर, ‘बिहारी’ पुकार कर गाली देने वालों के लिए यह कई उदाहरणों में से एक है। यदि अनपढ़ और गँवार बिहारी का…

हर वर्ष रावण का पुतला जलाने की क्या आवश्यकता है?

बिल्कुल आवश्यकता है। बल्कि यह आवश्यकता सदैव रहेगी। क्या अब भेष बदल कर लड़कियों के साथ छल करने वाले रावण नहीं है धरती पर? गृहस्थों की गृहस्थी तबाह करने वाली सूर्पनखाएँ नहीं क्या? सज्जन दिखने…

अगर इजराइल इन तीन मुद्दों में से एक पर भी कमज़ोरी दिखाता है, तो !

खाँटी वामपन्थी तो यही मानने के लिए तैयार नहीं होंगे कि हमास कोई आतंकवादी संगठन है जिसने कुछ ऐसा किया है जिसके लिए उसका समूल नाश हो ही जाना चाहिए, पर नव-वामपन्थी यह लाइन ले सकते हैं कि हमास…