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#editorial

कब तक शिवलिंग को फव्वारा बता सकते हो?

जिन लोगों ने विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका लोकतंत्र के तीनों स्तंभों को सिस्टम के मकड़जाल में उलझा कर पिछले 7 दशकों से रखा हुआ था, अब वो दिन लद गए।

पैसा , औरत और अदालतों के फ़ैसले

अभिषेक मनु सिंधवी अपने चैंबर में एक समय एक महिला वकील से मुख मैथुन का लाभ लेते हुए किस तरह जस्टिस बनवाने का वादा करते हुए एक वीडियो में वायरल हुए थे

ऐ अखिलेश , ऐ अखिलेश !

विधानसभा में अखिलेश यादव जिस तरह तू-तकार करते हुए केशव मौर्य के बाप तक पहुंच गए , वह बहुत ही गंभीर मामला है। बहुत ही आपत्तिजनक। वह समय दूर नहीं जब इसी उत्तर प्रदेश विधान सभा में कोई अखिलेश…

सावरकर को कभी ऐसे भी जानिए न !

कभी इंदिरा गांधी के मार्फ़त भी सावरकर को जानिए। कभी पता कीजिए कि इंदिरा गांधी ने संसद में सावरकर का चित्र क्यों लगाया ? इंदिरा गांधी ने सावरकर के नाम पर डाक टिकट क्यों जारी किया? इंदिरा गांधी…

ब्राह्मण और यहूदी के डीएनए मिलान का अभियान क्यों चल पड़ा है?

आजकल ब्राह्मणों का डीएनए यहूदियों से मिलाने का अभियान चल पड़ा है विशेष रूप से चितपावन ब्राह्मणों का । महाराष्ट्र कोंकण में चितपावन ब्राह्मण पाये जाते हैं और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ में उनका…

ज्ञानवापी मामले को लेकर क्या पूजा स्थल कानून को खत्म करने की आवश्यकता है?

देश में 70 साल के गंदे एकोसिस्टम ने मजहब वालों के मन में बिठा दिया है कि कब्जा हो जाने से मालिकाना हक मिल जाता है।

क्या होता अगर सप्ताह में शुक्रवार ना हुआ करता?

दहशत का शुक्रवार से पुराना संबंध है। कभी उन्माद में बदल जाता है तो कभी नरसंहार में। 'डायरेक्ट एक्शन डे', 16 अगस्त 1946 शुक्रवार का दिन था। 19 जनवरी 1990, "रलीव, गलीव, व चलीव" के नारों से…