www.positiveindia.net.in
Browsing Tag

गांधी

अगर हम क्रांतिकारियों के यशोगान के मुक़ाबले ग़द्दारों के लिए शर्मिंदगी महसूस करते और…

गाँधी को कितना भी उलाहना दें मुल्क में इतने ग़द्दारों के रहते कोई क्रांतिकारी आंदोलन सफल होना संभव ही न था । रास्ता गाँधी का ही सही था ।

सावरकर की समकक्षता में, राजनीतिक फलक पर न गांधी आते हैं न नेहरू

गांधी की सफलता और गांधी का पाखंड, कांग्रेस की गांधी पर निर्भरता और कांग्रेस का पाखंड। इस टुच्चेपन की तुलना सावरकर के गौरवशाली जीवन से करते हुए सावरकर को तुच्छ बना कर पेश करने की राजनीति पर…

गाय को दयाधर्म की मूर्तमंत कविता क्यों कहा जाता है?

"गाय का अर्थ मैं मनुष्य के नीचे की सारी गूँगी दुनिया करता हूँ। इसमें गाय के बहाने इस तत्त्व के द्वारा मनुष्य को सम्पूर्ण चेतन-सृष्टि के साथ आत्मीयता का अनुभव कराने का प्रयत्न है। गाय दयाधर्म…

हिंदू धर्म के डीएनए में एकता क्यो नहीं है ?

सावरकर समझते थे कि एकत्व क़ायम किए बिना बाहरी शक्तियों से लड़ा नहीं जा सकेगा। यही कारण था कि वे जाति-प्रथा के विरोधी थे, क्योंकि जातिगत विभेद हिंदू-एकता में बड़ी बाधा था। सावरकर एक राष्ट्र, एक…

आज तमाम राजनीतिक दल दलित वोटों की सौगात पाने के लिए अम्बेडकर जयंती की रिश्वत लिए खड़े…

आज तमाम राजनीतिक दल दलित वोटों की सौगात पाने के लिए अम्बेडकर जयंती की रिश्वत लिए खड़े दिख रहे हैं । हर साल दीखते हैं । लेकिन क्या यह दलित वोटर भी नहीं जानते कि यह राजनीतिक दलों के लोग…

सावरकर और गाँधी-२

सावरकर को सर्वाधिक पीड़ा हुई मोपला विद्रोह के नाम पर मालाबार में मुसलमानों द्वारा हिंदुओं के नरसंहार से । मालाबार हिंदू हिंसा इतने बड़े पैमाने पर थी कि उसे मालाबार का दूसरा जिहाद कहा जाता…

सावरकर और गाँधी क्रम-1

सावरकर और गाँधी दो अलग-अलग ध्रुव हैं एक के समर्थक को दूसरे के विरूद्ध खड़ा होना पड़ेगा । यह संयोग नहीं है कि जब मोदी जी ने संसद में सावरकर के चित्र का अनावरण किया तो उनकी पीठ के ठीक पीछे…

भारत के क्रांतिकारी सपूतों के साथ गद्दारी करने वालों को क्या आप जानते हैं?

यदि हम क्रांतिकारियों के यशोगान के मुक़ाबले ग़द्दारों के लिए शर्मिंदगी महसूस करते और उनका समाज में सिर उठा कर चलना मुश्किल कर देते तो देश का ज़्यादा भला होता । भगत सिंह के ग़द्दारों में…