गांधी की सफलता और गांधी का पाखंड, कांग्रेस की गांधी पर निर्भरता और कांग्रेस का पाखंड। इस टुच्चेपन की तुलना सावरकर के गौरवशाली जीवन से करते हुए सावरकर को तुच्छ बना कर पेश करने की राजनीति पर…
"गाय का अर्थ मैं मनुष्य के नीचे की सारी गूँगी दुनिया करता हूँ। इसमें गाय के बहाने इस तत्त्व के द्वारा मनुष्य को सम्पूर्ण चेतन-सृष्टि के साथ आत्मीयता का अनुभव कराने का प्रयत्न है। गाय दयाधर्म…
सावरकर समझते थे कि एकत्व क़ायम किए बिना बाहरी शक्तियों से लड़ा नहीं जा सकेगा। यही कारण था कि वे जाति-प्रथा के विरोधी थे, क्योंकि जातिगत विभेद हिंदू-एकता में बड़ी बाधा था। सावरकर एक राष्ट्र, एक…
आज तमाम राजनीतिक दल दलित वोटों की सौगात पाने के लिए अम्बेडकर जयंती की रिश्वत लिए खड़े दिख रहे हैं । हर साल दीखते हैं ।
लेकिन क्या यह दलित वोटर भी नहीं जानते कि यह राजनीतिक दलों के लोग…
सावरकर को सर्वाधिक पीड़ा हुई मोपला विद्रोह के नाम पर मालाबार में मुसलमानों द्वारा हिंदुओं के नरसंहार से ।
मालाबार हिंदू हिंसा इतने बड़े पैमाने पर थी कि उसे मालाबार का दूसरा जिहाद कहा जाता…
सावरकर और गाँधी दो अलग-अलग ध्रुव हैं एक के समर्थक को दूसरे के विरूद्ध खड़ा होना पड़ेगा । यह संयोग नहीं है कि जब मोदी जी ने संसद में सावरकर के चित्र का अनावरण किया तो उनकी पीठ के ठीक पीछे…
यदि हम क्रांतिकारियों के यशोगान के मुक़ाबले ग़द्दारों के लिए शर्मिंदगी महसूस करते और उनका समाज में सिर उठा कर चलना मुश्किल कर देते तो देश का ज़्यादा भला होता । भगत सिंह के ग़द्दारों में…
गांधी के सत्य का राम नाम सत्य करते गांधी के असली दुश्मन असल में कांग्रेस में ही बैठे थे। धीरे-धीरे गांधी इतने लाचार हो गए कि एक मुहावरा ही बन गया कि मजबूरी का नाम महात्मा गांधी।