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पान के शौक़ीनों जागो और गुटके के अभिमान को तोड़ो

-कवि राजेश जैन राही की कलम से-

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Positive India:Rajesh Jain:
*खाइके पान बनारस वाला*
70 के दशक में एक फिल्मी गीत आया- *खाइके पान बनारस वाला खुल जाए बंद अकल का ताला*
बनारस की तो बहुत सारी चीज़ें प्रसिद्ध हैं लेकिन इस फिल्मी गीत ने पान को विशेष प्रसिद्धि दी। उस दौर में जगह-जगह विक्रेताओं ने अपनी दुकान पर ‘बनारसी पान’ का बोर्ड लगा लिया। ख़ूब बिके पान। क्या ज़माना था जब पान के शौक़ीन, पान के लिए आधा-आधा घंटा दुकान पर खड़े रहते थे। ‘भाई ज़रा जल्दी पान देना’ की आवाज गूँजती रहती थी।
हिंदी फिल्मों के हिट गीत भी पान ठेलों पर ख़ूब बजाए गए। उस दौर में पान ठेलों पर आईना जरूर होता था, जहाँ शौक़ीन अपने बालों को भी सँवार लिया करते थे, मगर समय बदलते देर नहीं लगती, पान को निगल लिया गुटके ने।
बड़े-बड़े अभिनेता, बड़े-बड़े पोस्टरों में गुटखा खाते नज़र आने लगे, मानो गुटका न हो वाकई कोई केशर हो। अभिनेता ख़ूब मालामाल हुए, बिगड़ा तो बेचारे आम-नागरिक का। भोले-भाले नागरिक केसर समझकर, गुटखा गटकते रहे और बीमार पड़ते रहे।
पान के बुरे दिन कोरोना काल में और बुरे हो गए। पान मिला नहीं और गुटका सर्वत्र मिलता रहा। सुनते हैं गुटखा लॉबी है जो इस पर प्रतिबंध लागू ही नहीं होने देती।
बेशक पान की कोई लॉबी नहीं, पान फिर से पुनर्जीवित हो सकता है बस ज़रूरत है एक हिंदी फिल्मी गीत की। हमारे छत्तीसगढ़ के गरियाबंद के पान विक्रेता जीवन लाल देवांगन जी का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज़ है, पान की अत्यधिक वैरायटियों के लिए। इन्हें भी पान का ब्रांड एंबेसडर बनाया जा सकता है बस थोड़ी सी राजनीतिक इच्छाशक्ति की ज़रूरत है। रायपुर शहर में एक पान की दुकान है जिसका नाम बनारसी पान वाला नहीं ‘प्रेमिका पान पैलेस’ है अगर आप अपने प्रेम का इज़हार नहीं कर पा रहे हैं तो बस यहाँ साथ आकर उन्हें पान खिला दीजिए, बिना शब्दों के आपको इज़हार हो जाएगा। भला कोई गुटका विक्रेता इतना नेक कार्य कर सकता है?
पान के शौक़ीनों जागो और गुटके के अभिमान को तोड़ो।

लेखक:राजेश जैन ‘राही’-(ये लेखक के अपने विचार है)

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