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साहिर लुधियानवी को उन के जन्मदिन पर नमन !
साहिर ने महिलाओं की पीड़ा का बचपन से एहसास किया था और अपने गीतों में उसे शिद्दत से बयान भी किया ।
मौज मस्ती के महापर्व होली पर ही विदा हो गया मौजमस्ती, हंसी ठहाकों का…
सतीश कौशिक की इन भूमिकाओं को लोग आज भी याद करते हैं। यह उस दौर की बात है जब कादर खान, शक्ति कपूर की जोड़ी हास्य के नाम पर अश्लीलता फूहड़ता भोंडेपन की सारी हदें पार कर रही थी। इन सारी विकृतियों…
तमिलनाडु में नेता या अभिनेता भाषावादी राजनीति में अपनी राजनीतिक रोटियां क्यो सेकते…
तमिलनाडु के लोगों को समझ जाना चाहिए यह पेरियार वादी राजनीति हमेशा से खतरनाक रही है यह पहले अमीर और गरीबों को लड़ाएगी, जातिवाद में लड़ाएगी और अंत में जब कुछ नहीं मिलेगा तब भाषा के आधार पर…
कैसे-कैसे कारनामे किए हैं सिसोदिया ने!
ईडी ने आज सिसोदिया को फिर से गिरफ्तार किया है। यह अपने आप में एजेंसियों के कॉन्फिडेंस की बात है। इतने बड़े जोखिम में सिसोदिया को उनके अंजाम तक पहुंचा देना तय है।
बड़के साबजी बहुत गुस्सा मे है कि सरकार ने चुनाव आयुक्त की नियुक्ति जल्दबाजी में क्यों…
अगर सरकार एक बार सुझाये नामों से सहमत नहीं है तो कॉलेजियम को उन्हें बदलना चाहिए...ये कैसी तानाशाही है कि आप दोबारा वही नाम भेजेंगे क्योंकि वो सरकार को मानने ही होंगे। आप सरकार पर डंडा नहीं…
राहुल गांधी के बयान को विवाद का विषय मानने के बजाय विमर्श का विषय क्यो मानना चाहिए?
राहुल गांधी क्या बोलते हैं, के बजाय क्यों बोलते हैं, इस पर बिल्कुल अलग तरीके के विमर्श की आवश्यकता है। विवाद मानने से हल नहीं हो सकता।
कुतर्की और नफरत के शिलालेख लिखने वाले जहरीले लोगों के विमर्श में फंसने से कृपया बचें
तुलसीदास ने रामचरित मानस हिंदी में नहीं अवधी में लिखी है। अवधी जुबान है रामचरित मानस की। और कि किसी भी अवधी वाले से , अवधी जानने वाले से पूछ लीजिए कि अवधी में ताड़न शब्द का अर्थ क्या है ? वह…
विश्व महिला दिवस पर विशेष आलेख
एक स्त्री का जीवन कैसा हो, इसे तय करने का अधिकार स्त्री के सिवा किसी और को नहीं है।
रंग शब्द हमारा नहीं है फिर हमनें इसे क्यो अपनाया ?
इस्लाम का आगमन जिस प्रकार से भारत में हुआ, फारसी से लिया गया शब्द 'रंग' को उर्दू के माध्यम से सूफियों ने भी भारत में खासकर उत्तर भारत में लोकप्रियता दिलाई।
राहुल की हर बात पर भौंकते भाजपाई !
राहुल की एक बात पर दस भाजपाई भौंकते हैं। जिस राहुल गांधी के पास कोई जनाधार नहीं है , भाजपाइयों का बौखलाना और भौंकना ही राहुल का अब आधार है।