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Uttar Pradesh

Positive India:Delhi; यहां की एक अदालत ने निर्दलीय सांसद नवनीत राणा और उनके विधायक पति रवि राणा को मुंबई पुलिस की हिरासत में भेजने की मांग को खारिज करते हुए उन्हें 14 दिन की न्यायिक…

दुनिया के राजनीतिक विश्लेषकों के लिए भाजपा की यात्रा कौतूहल का विषय : योगी

पॉजिटिव इंडिया :लखनऊ, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को देश को सबसे ऊपर रखने वाली 'एकमात्र पार्टी' करार दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा की…

उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव सपा विधायक दल नेता चुने गए

पॉजिटिव इंडिया : लखनऊ; समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को शनिवार को यहां हुई पार्टी के नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक में सर्वसम्मति से सपा के विधायक दल का नेता चुना…

उत्तर प्रदेश मुफ्त राशन योजना की अवधि तीन महीने आगे तक बढ़ाई

पॉजिटिव इंडिया: लखनऊ; उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शनिवार को मंत्रिमंडल की पहली बैठक में कोविड-19 महामारी के दौरान शुरू की गई मुफ्त राशन योजना को तीन महीने तक…

होइहै वही जो राम रचि राखा…!!!

Positive India:Satish Chandra Mishra: होइहै वही जो राम रचि राखा...!!! आम जनता और लुटियन दिल्ली की खैराती मीडिया को चौंकाने वाले, लेकिन मेरे लिए दो अपवादों को छोड़कर पूरी तरह प्रत्याशित…

10 मार्च के बाद अपनी तुलना चवन्नी से भी करने लायक़ नहीं रह जाएंगे जयंत चौधरी !

27 जनवरी , 2022 को दयानंद पांडेय ने यह लेख लिखा था। अब देखिए कि जयंत चौधरी की दुर्गति चवन्नी से भी कैसे गई गुज़री हो गई है ?

लोकतंत्र के आख़िरी चुनाव से नैतिक जीत के इल्हाम तक

सेक्यूलरिज्म के नाम पर , मुस्लिम के नाम पर दाग़ है डाक्टर कफील। बच्चों का हत्यारा है वह। पिता की विरासत सपा को नेस्तनाबूद करने का अगर प्रण ही ले बैठे हों तो और बात है।

कश्मीर फ़ाइल्स में नरसंहार देखने के बाद नींद क्यों उड़ गई है मेरी ?

कश्मीर फ़ाइल्स चुपचाप चीख़ती है। चीख़ती हुई कश्मीरी पंडितों के नरसंहार की लोमहर्षक कथा कहती है। बिना लाऊड हुए। कश्मीरी पंडितों के लहू में डूबी कथा। क्या स्त्री , क्या बच्चे , क्या बूढ़े , क्या…

आप भ्रष्टाचार करें बलात्कार करें और भारत मां को डायन तक कहे पर आपसे कोई कोई सवाल ना…

अभी गायत्री प्रजापति , आज़म खान जेल में हैं। लालू यादव की तरह कब तुम भी जेल पहुंच जाओगे , पता ही नहीं चलेगा। सवाल तब और ज़्यादा पूछे जाएंगे। खरीदी हुई मीडिया और मीडिया मालिक तब काम न आएंगे।…

कहां गया ईवीएम आंदोलन? कहां गया टूटता लोकतंत्र?

क्या बोलते हो, क्या चाहते हो, कैसी राजनीति करते हो सारा संदेश पल भर में देशभर को पहुंच जाता है। सारे नैरेटिव टूटकर ध्वस्त हो जाते हैं। सारा एजेंडा बेआबरू हो जाता है।