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Uttar Pradesh
अगर योगी भी ताश की गड्डी में समा गए होते तो क्या मंज़र होता उत्तर प्रदेश में ?
कुछ समय पहले भाजपा गुजरात , उत्तराखंड समेत अपने सभी मुख्य मंत्रियों को ताश की गड्डी की तरह फेंट रही थी। उस समय अगर योगी आदित्यनाथ भी सरेंडर कर ताश की गड्डी में शामिल हो गए होते तो उत्तर…
बुलडोजर बाबा के जीतने पर इतना सन्नाटा क्यों है भाई!!
अब उत्तर प्रदेश वालों ने योगी जी को पूरे देश के लिए उपलब्ध करा दिया है। चार दशकों में ऐसा पहली बार हुआ कि उत्तर प्रदेश वालों ने पूरे देश की मांग पर किसी मुख्यमंत्री को दोबारा अवसर दिया।…
जब डिम्पल यादव को भी नहीं छोड़ा सपाइयों ने
पहले यह सपाई पुलिस को सिर्फ़ जुबानी धमकी देते थे। कहते थे सरकार आने दो , देख लेंगे। अब पुलिस वालों को पीटने भी लगे हैं। और तो और हत्यारे मुख़्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी ने तो कल मऊ की एक…
तो योगी सरकार तो गई !
तो योगी सरकार तो गई ! ऐसी ख़बरों के साथ उत्तर प्रदेश में पेड न्यूज़ अभी भी उछाल मार रहा है। इसी वसंत बहार में झूम-झूम कर सोशल मीडिया का सेक्यूलर चैंपियन , पेड मीडिया की ख़बरों को ले कर अफवाह…
जंगल राज की फिर ग़लती से भी वापसी न हो , इस लिए ऐसा मुसलसल लिख रहा हूं
उत्तर प्रदेश की तरक़्क़ी के लिए जंगल राज को रोकना बहुत ज़रुरी है। चाहे कुछ भी करना पड़े। मनुष्यता के लिए भी जंगल राज को रोकना बहुत ज़रुरी है।
इन जालसाजों ठगों को सबूत के साथ पहचानने की क्यों जरूरत है ?
5 वर्ष पूर्व 2017 में हुए उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान भी यही न्यूजचैनल इसी तरह का अभियान चला कर सरासर सफेद झूठ को प्रचारित कर के उत्तरप्रदेश की जनता को भ्रमित करने, उसे बरगलाने में…
जब शराब के चक्कर में फ़िराक गोरखपुरी की गोरखपुर में ज़मानत ज़ब्त हो गई
फ़िराक बड़ी शान से कहा करते थे कि हिंदुस्तान में अंगरेजी सिर्फ़ ढाई लोग जानते हैं । एक खुद को मानते थे , दूसरे सी नीरद चौधरी और आधा जवाहरलाल नेहरु।
साइकिल बम की सिसकी और न रहे सांप , न बजे बांसुरी की धुन में दंगेश की त्रासदी लिए…
कैराना पलायन के अपराधियों और मुज़फ़्फ़र नगर के दंगाइयों पर अखिलेश के उपकार आज भी जारी हैं। योगी ने अखिलेश यादव की इसी फितरत को देखते हुए अखिलेश को दंगेश नाम दे दिया है। दंगा , गुंडई , आतंकवाद ,…
लेकिन पहलवान मुलायम को आज करहल में कराहते देखना गुड क्यों नहीं लगा?
अखिलेश कहीं न कहीं बहुत असुरक्षित दिख रहे हैं। इसी लिए करहल में आज मुलायम ही नहीं , समूचा परिवार इकट्ठा कर लिया था। लेकिन पहलवान मुलायम को आज करहल में कराहते देखना गुड नहीं लगा। उन की भर्राई…
अखिलेश यादव के बहाने कामरेड गुरु प्रसाद तिवारी की क्यों आई याद ?
सपा की सरकार बनने पर क्या अखिलेश यादव सचमुच क़ानून व्यवस्था कल्याण सिंह या योगी की तरह या अपनी बुआ मायावती की तरह चाक-चौबस्त कर पाएंगे ? अभी तो वह खुद मंच से ही पुलिस की ऐसी-तैसी करते दिख रहे…