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झूठ को बचाने लोग, सड़कों पे आ गए।
नेता कुछ ऐसे हैं जो, खादी तो पहनते हैं,
बाँट रहे देश आज, बैरियों को भा गए।
71वें गणतंत्र दिवस की आप सभी को बहुत बहुत शुभकामनाएँ और बधाई
कैसे इस गणतंत्र की,
पूरी होगी आस।
मुख पे मुखौटे लिए, कई जिन्नावादी हैं।
धरने पे बैठे पर, धरती से प्यार नहीं,
कैद में विचार और, मांगते आजादी हैं।
कौन मेरे सोए हुए, देश को जगायेगा
दे रहे गवाही अब, धूर्त आगे बढ़कर,
सत्य को बचाने कहो, कौन आगे आयेगा।
नागरिकता कानून पर कवियों से एक कवि की अपील
राजहंस बनकर, घूम रहे बगुले भी,
काली करतूत कोई, कैसे जान पाएगा।
कुछ साथी आए थे पीने हाथों में लेकर प्याला
कुछ बैठे थे बंद घरों में ,
पा न सके वो मधुशाला।
वही नागरिक घोषित होगा जिसके हाथों में प्याला
रखे तिरंगा सबसे ऊपर,
सदा न्याय की बात करे।
नतमस्तक है उसके आगे,
राही की यह मधुशाला।।
कुर्सी मिलते ही गये, जिह्वा से श्री राम
पूरा कब का हो चुका, सावरकर का काम
पूरी होगी एक दिन, महापौर की खोज
Positive India:Rajesh Jain Rahi:
1-फिर साजिश रचने लगी, नयी मंथरा आज।
पुत्र मोह में कैकई, भूली लोक लिहाज।
2- पूरी होगी एक दिन, महापौर की खोज।
अभी शेष कुछ दाँव हैं, पेपर पढ़िए…
नववर्ष की राम राम शुभकामनाओं के साथ
राम जी का साथ मिले, सत्य की सौगात खिले,
नववर्ष न्याय वाला, मिलके मनाइए।