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संविधान की दुहाई, देते खुद तोड़कर
गंगा बहती है मेरे देश में सभी के लिए
धरने की ओर धारा, कुछ मोड़ने लगे।
मिलता है कहीं मान, कहीं अपमान होता
Positive India:Rajesh Jain Rahi:
मिलता है कहीं मान, कहीं अपमान होता,
दुनिया के सारे आप, रंग देख लीजिए।
बदली किताब और, कायदे बदल गए,
नयी दुनिया के नये, ढंग देख लीजिए।
ढीले-ढाले…
दुनिया के सारे आप, रंग देख लीजिए
वक़्त अच्छा देख लिया, साथ आपके थे सब,
धूप हुई तेज कौन, संग देख लीजिए।
मिले जो गरीब कोई, हँसी न उड़ाइये
दिल से मदद हो वो, दिल तक जा सके जो,
हाथ पर हाथ रख, गले लग जाइए।
मांगते थे जो प्रमाण, सैनिकों की वीरता का
सुनते थे कभी दिल्ली, दिलवालों को मिलेगी,
अवसरवादी सारे, यहीं बढ़ने लगे।
मुफ्त वाली राजनीति, काम की है आजकल
गुड सबको लुभाए, गुलगुले सब खाएं,
कौन उपजाये कहो, गन्ना मेरे देश में।
गुमराह कुछ राह, सबको बता रहे
कुछ हैं सताये हुए, कुछ बहकाये हुए,
नामधारी कुछ मेरे, देश को सता रहे।
देशप्रेम का प्याला जिसको, पूरे मन से पीना हो
बहकावे में पढ़े लिखे हैं,
बहकावे में हैं आला।
माँ सरस्वती के श्री चरणों में शत शत नमन
भारती की शान पर, शब्द-शब्द वार कर,
वंदे मातरम बोल, मैं निखर जाऊँगा।
चर्चा में है आजकल, केवल शाहीन बाग
अवसर है मतदान का, जली रहेगी आग।
चर्चा में है आजकल, केवल शाहीन बाग।।