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पत्थर के नीचे दबे, गाँधी के अरमान।
Positive India:Rajesh Jain Rahi:
1- पुनः मुफ्त बँटने लगा, हिंसा का सामान।
पत्थर के नीचे दबे, गाँधी के अरमान।
2-कैसा है वो नागरिक, इसका मिला प्रमाण।
पत्थर के आधार पर, चाहे जो…
Shashi Tharoor Wins Sahitya Academy Award
Seven books of poetry were awarded to Dr. Phukan Ch. Basumatary (Bodo), Dr. Nand Kishore Acharya (Hindi), Sri Nilba A. Khandekar (Konkani), Sri Kumar Manish Arvind (Maithili), Sri V.…
राम का संदेश जन, जन को सुनाऊँगा
मात जानकी का नेह, साथ मेरे रहा यदि,
ऋण मातृभूमि वाला, कुछ तो चुकाऊँगा।
देश पूरा राम जी का, धाम होना चाहिए।
कर्णधार करते हैं, कुर्सियों की खोजबीन,
खोज में भरत वाला, ग्राम होना चाहिए।
बहुरूपियों के आप, झांसे में न आइए।
स्वर्ण मृग बनकर, आपको लुभाते खूब,
बहुरूपियों के आप, झांसे में न आइए।
PM Modi Unveils Bridgital Nation
The book Bridgital presents a powerful vision of the future where technology and human beings co-exist in a mutually beneficial ecosystem. It argues that instead of accepting technology as…
प्रेमिका की चाल पर, जान नहीं जाती अब
हँसना तो चाहूँ पर, किस बात पे हँसू मैं,
हँसी मुझे अपने ही, हाल पर आती है।
तन के खड़ी है अब, मोड़ पर नीली टोपी
छूट रहे छक्के अब, दिग्गजों के रोड पर,
कटा जो चालान कुछ, रोड पर आ गए।
भाषाएं काफी मगर, हिंदी लगती ज्येष्ठ
गीतों को मैंने दिया, मनचाहा आकार।
अन्तर्मन के पास था, हिंदी का आधार