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Editorial
गोदी मीडिया के बहाने और निशाने
मीडिया का एक ख़ास पॉकेट मोदी का पिट्ठू बन गया है तो इस में अचरज क्या है भला। ब्रिटिश पीरियड से यह परंपरा जैसे भारतीय मीडिया का चलन बन गया है। मीडिया का एक ख़ास पॉकेट तो आज की तारीख में सोनिया…
जब मज़हब भारी हो जाता है तो एक जिन्ना खड़ा हो जाता है और पाकिस्तान पैदा हो जाता है
मुस्लिम समस्या ठीक वैसे ही जैसे जो पाकिस्तान बनते समय थी । वह है मुस्लिम प्रिवलेज । अब धीरे धीरे यह प्रिवलेज फिर से पूरे देश में पांव पसार चुका है ।
प्रसिद्धि ही यदि पैमाना है, तो क्या दाऊद इब्राहिम और हाफिज सईद को भी नमन करना चाहिए?
और तो और, आजकल उर्फी जावेद जितनी प्रसिद्ध है, उतने प्रसिद्ध तो जावेद अख्तर भी नहीं हैं। तो क्या किया जाए?
शर्मनाक! अत्यंत शर्मनाक!!
क्या मनुष्य के सबसे सुंदर अंग उसके पांव ही होते हैं?
स्त्री नख से शिख तक सुन्दर होती है, पुरुष नहीं। पुरुष का सौंदर्य उसके चेहरे पर तब उभरता है जब वह अपने साहस के बल पर विपरीत परिस्थितियों को भी अनुकूल कर लेता है।
जेएनयू से ब्राह्मणों के विरोध में उठा सुर एक विमर्श के रूप में क्यो स्थापित हो गया है…
ब्राह्मण का विरोध ब्राह्मणों की एक परीक्षा की तरह भी तो है। बौद्धिकता पर कब्जा है तो इसमें बिना आवेशित हुए सफल होना पड़ेगा। शस्त्र उठाए बिना जीतना पड़ेगा। समाज का संरक्षण करना पड़ेगा।…
छत्तीसगढ़ के 94.7 प्रतिशत किसान “किसान सम्मान निधि” से क्यो हुए बाहर ?
छत्तीसगढ़ को 'धान का कटोरा' कहा जाता है, परन्तु एक और अंतरराष्ट्रीय कहावत भी मशहूर है कि "धान की खेती और गरीबी का चोली दामन का साथ होता है"
आख़िर रवीश कुमार अब अपने दिल को समझाने कहां जाएं ?
रवीश कुमार की फैन फालोइंग तमाम डिस्टर्ब , तमाम तबाह , परेशान लोगों की वैसे ही तो है नहीं है। कुछ तो बात है । सारी निगेटिव खबरें इन की खुराक हैं। कभी ठंडे दिमाग से सोच कर देखिए कि रवीश कुमार…
रवीश कुमार ने ऐसा क्यों कहा कि वे वह चिड़िया है जिसका घोंसला लेकर कोई और उड़ गया?
एनडीटीवी को देखें तो सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुका था। एकदम मनहूस मृत सा हो गया था एनडीटीवी। क्यों ऐसा हुआ? दर्शकों का तो भर भर कर आभार प्रकट कर रहे हैं। रविश कुमार जब दर्शकों की कमी ही नहीं…
क्या द कश्मीर फ़ाइल को वल्गर बताने वाले नदाव लैपीड की सिर्फ भर्त्सना पर्याप्त है?
इस्राइल के राजदूत ने नदाव की भर्त्सना की है और इसे मेज़बान देश यानी भारत का अपमान बताया है । किंतु यह भर्त्सना पर्याप्त नहीं है । नदाव का वक्तव्य कश्मीरी पंडितों की नस्लक़ुशी का मखौल उड़ाता…
एनडीटीवी के प्रमोटर ग्रुप से डॉ. प्रणय और राधिका रॉय की विदाई पर अभिरंजन कुमार की…
डॉक्टर रॉय के कमज़ोर विज़न के कारण उनका एनडीटीवी संस्थान भारत के इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पहला "गोदी मीडिया" बन गया और अपनी "गोदी पत्रकारिता" को ही आदर्श पत्रकारिता सिद्ध करने के लिए उसने…