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Editorial
वर्ल्ड फोटोग्राफी डे : चित्रकला और छायांकन का वही सम्बंध है, जो रंगमंच और सिनेमा का…
फ़ोटोग्राफ़ी भी एक कला हो सकती है, इस बात को मनवाने के लिए छायाचित्रकारों ने लम्बा संघर्ष किया है।
क्या आप जानते हैं भारतीय राजनीति का तुर्की से कितना बड़ा पुराना नाता है?
सौ साल में भारत का ख़लीफ़ा समर्थक मुसलमान अब तक पाकिस्तान बना चुका है जिसे कश्मीर के लिये तुर्की के समर्थन की जरूरत है बदले में वह अर्दोगन को ख़लीफ़ा तसलीम करने को तैयार है ।
IPL की तैयारी और राष्ट्रभक्ति का स्वांग
पैसे कमाना अनुचित नहीं, परंतु दर्शकों और खेलप्रेमियों को अपना दास समझने वाले कई क्रिकेटरों के भीतर राष्ट्रप्रेम जैसी भावना बची है, इस पर अब संदेह हो रहा है। टीम के पास कोई रोडमैप नहीं दिखता।…
बचपन का वह 15 अगस्त आजादी का दिन तनिक अधिक आजादी वाला क्यो होता था?
पन्द्रह अगस्त आजादी का दिन था, तो उस दिन तनिक अधिक आजादी होती थी। उस दिन साइकल तनिक अधिक चलाया जा सकता था, स्कूल से घर आने के सामान्य रास्ते को छोड़ कर 'उसके' गाँव की ओर से भी निकल सकते थे।…
लाल किले की प्राचीर से मोदी शासन का यह 10वाॅं संवाद अलग क्यों है?
10वें संबोधन का जो सबसे महत्वपूर्ण टर्म है वह है, 'तीसरा टर्म' और 'विश्व अर्थव्यवस्था में भारत के तीसरे स्थान का लक्ष्य'। बड़ी साफ बात है कि तीसरे टर्म के लिए एक बार फिर बड़ी सफाई से विकास…
बार-बार बुलेट ट्रेन के आगे कोयले का इंजन खड़ा कर देने का क्या तुक ?
नेहरु हमारी विरासत हैं , शान हैं , नरेंद्र मोदी जीता-जगता सच ! शानदार सच। सपने बुरे नहीं होते पर सच भी सुंदर होता है। सपना भी सुंदर , सच भी सुंदर। कभी ऐसे भी देख कर देखिए।
जनसंख्या वृद्धि देश में सुराज स्थापना का पहला लक्षण हैं
तुम ही भविष्य हो मेरे भारत विशाल के
इस देश को रखना मेरे बच्चों सँभाल के
वे लोग क्यो धन्य हैं जो भारत में अल्पसंख्यक होकर जन्मे हैं ?
कुछ समय पहले उज्जैन के मदरसों ने हिंदू मंदिर द्वारा आपूर्त मध्याह्न भोजन स्वीकार करने से इन्कार कर दिया । मंदिर का प्रसाद उनके लिये हराम होता है तो मंदिर की कमाई भी हराम ही होनी चाहिये ।…
राहुल गाँधी की “फ्लाइंग किस”का बचाव पत्रकार राहुल देव ने क्यो किया?
बुढ़ापे में मति भ्रष्ट हो गई है वरिष्ठ पत्रकार राहुल देव की। अभिवादन के प्रकार और संदर्भ, समाज और स्थान के हिसाब से होते हैं। दो सांसद, जो कि पति-पत्नी हैं, बेडरूम में साथ में सोते हैं, तो…
स्मृति ईरानी ने सदन में विपक्षियों को धो डाला
स्मृति ईरानी जब सदन में बोलती हैं तो सदन के भीतर तो ठीक, सदन के बाहर भी लोगों के सदमे आने शुरू हो जाते हैं।