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Editorial
तो दर्शन करेंगे राम का , वोट देंगे इंडिया गठबंधन को
अयोध्या में रामलला के दर्शन कर आप मोदी को वोट देने से मुकर जाएं , कुछ नहीं , बहुत मुश्किल है। यह तो राम की चाहत है। और चाहत को भुला देना कठिन होता है। स्थिति यह है कि अभी जिन असंख्य लोगों ने…
विपक्ष को अग्निवीर से चिढ़ क्यों है?
स्कूल और कुछ नहीं, नैसर्गिक विकास को रोककर बच्चों को गुलाम, परावलम्बी, भिखारी, व्यसनी और यौन विकृत बनाने के अड्डे हैं। जिनका धन सरकार देती है, रॉ मेटेरियल यानि बच्चे समाज देता है। 1000…
अरब इस्राइल संघर्ष इस्राइल लिये अस्तित्व की लड़ाई है । या तो वे जीतेंगे या मिट…
इस्राइलियों को सदियों भटकने के बाद अनेक देशों में अनेक यातनायें सहने के बाद गैस चैम्बरों में अपने पूर्वजों को खो देनेके बाद अपना खोया हुआ देश वापस मिला है । अरब इस्राइल संघर्ष उनके लिये…
जो जीता – वो बाजीराव
उस योद्धा को मुगल वंश का अंत करने का श्रेय मिलना चाहिए था, क्योंकि वही था जिसके कारण औरंगजेब का विशाल राज्य एक दिन चांदनी चौक से पालम तक सिमट कर रह गया। वही था जिसने दक्षिण में विधर्मी सत्ता…
राजीव गांधी की जीत को मात देती नरेंद्र मोदी की हाहाकारी जीत
कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के लोग जब हिंदू-मुसलमान और जाति-पाति के आचार्य जब थे , तब थे। अब इस का आचार्यत्व नरेंद्र मोदी के पास है। इसी लिए अनुमान से कहीं अधिक हाहाकारी जीत होने जा रही…
मणिशंकर अय्यर की बुद्धि क्या भ्रष्ट हो गई है ?
पाकिस्तान की इज़्ज़त करो उसके पास एटम बम है । मणिशंकर अय्यर की बुद्धि भ्रष्ट हो गई है । हमारे पास सन ७४ से बम है तो पाकिस्तान ने कभी हमारी इज़्ज़त की ?
हमारे समाज के लेखक का कबीर आख़िर कहां गुम हो गया है ?
हमारे लेखकों ने अपने कबीर को सोने के अंडे देने वाली मुर्गी की तरह अपने लालच , स्वार्थ और दंभ में मार डाला है । कबीर को मार कर अपने को नफ़रत और जहर का केंद्र बना लिया है । ज़रुरत अपने कबीर को…
आज ब्राह्मण सर्वाधिक दुष्प्रचार के शिकार क्यों हैं?
विप्र वंस की अस प्रभुताई
अभय होइ जो तुमहि डराई !
हल्दीघाटी का युद्ध! प्रताप अब भी जी रहे हैं। वे हमेशा जिएंगे…
Positive India:Sarvesh Kumar Tiwari:
हल्दीघाटी का युद्ध! हर क्षण कुछ शीश कट कर भूमि पर गिर रहे थे। युद्धभूमि की मिट्टी रक्त से भीग कर कींचड़ हो गयी थी। इस कीचड़ में जब घोड़ों के पैर पड़ते तो…
परित्यक्तों की पृथ्वी
कृष्ण की कथा इसमें सबसे रुचिकर है। कृष्ण से बड़ा निस्संग कौन हुआ? रण में, वन में, भवन में, भुवन में, प्रणय में, कलह में- वे एकाकी ही हैं, ठीक वैसे, जैसे कोई विराट-रूप सर्वथा असंग होता है।