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Editorial
महाकुंभ में सम्पन्न होगा सदानीरा त्रिवेणी लोक विमर्श
डेढ़ दो महीने चलने वाले संसार के सबसे बड़े मेले में जीवन का हर रंग उभरता है। उल्लास, आनन्द, भय, दुख, अवसाद... इस बार ही नहीं, हर बार... सारे भाव साथ दौड़ते हैं, पर अंततः जीतता है उल्लास! वही…
कभी नहीं जन्मे, कभी मरे नहीं…
10 अप्रैल 1989 को रजनीश ने अपने जीवन का अंतिम सार्वजनिक व्याख्यान दिया। यह 'द ज़ेन मैनिफ़ेस्टो' पुस्तक में संकलित हुआ है। वह व्याख्यान इन शब्दों के साथ समाप्त हुआ था : "गौतम बुद्ध के अंतिम…
ज्ञानी , मनमोहन और खड़गे की कैफ़ियत
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी देखते ही खड़े हो जाते हैं। राहुल के बैठने के लिए कुर्सी छोड़ देते हैं। प्रियंका गांधी के नामांकन के समय बच्चों की तरह झांकते हुए बाहर खड़े रहते हैं। इतना…
अगर कुंभ जितनी संख्या में अरबी, बंग्लादेसी, या रोहिंग्या इकट्ठे हों तो वे एक दूसरे को…
दुर्घटना से विचलित हो कर श्रद्धालुओं को भी उदण्ड या लापरवाह कहने वाले भी अनेकों लोग मिल जाएंगे, पर मैं उलट सोचता हूँ। मेरे हिसाब से इससे अधिक नियंत्रित भीड़ नहीं मिलेगी दुनिया में।
भारत में घुसे अवैध आप्रवासी अमेरिका की घटनाओं को बड़े ग़ौर से देख रहे हैं
ज़ंजीरों में जकड़ कर घुसपैठिये निकाले जा रहे हैं । और भारत में सीएए और एनआरसी को लाये हुए पाँच साल हो गये मगर कुछ न हुआ ।
कोई धर्म नगरी,सब त्यागने जाता है,कोई धर्म नगरी,प्रभु को पाने जाता है
भागिये कभी,जेहादियों से,भाग लीजिए कभी किसी नश्वर देह के पीछे,अपना स्वर्णिम अवसर खो दीजिए,भागना ही आपकी प्रवृत्ति है,क्योंकि ये ही आपकी नियति है..
ट्रंप का अमेरिका फर्स्ट बाकी दुनिया पर भारी पड़ने वाला है
अमेरिका WHO की फंडिंग करने वाला अग्रणी देश है । अमेरिका के पीछे हट जाने से तीसरी दुनिया के अनेक देश प्रभावित होंगे ।
तुम्हें अपने बर्क़ पे नाज़ है हमें तीलियों पे ग़ुरूर है
पृथ्वीराज चौहान के पतन के दस वर्षों के भीतर ही पंजाब से बंगाल तक तुर्कों का क़ब्ज़ा हो गया ।
कुम्भ मेले में एक आईआईटीयन को देखकर भारत-देश की जनता विस्मय-विमुग्ध हो गई
वास्तव में, अत्यन्त मेधावी होना संन्यासी होने की पहली शर्त है। गीता का 'कर्म-संन्यास' और 'मोक्ष-संन्यास'! यह उपदेश एक सुशिक्षित अर्जुन को दिया जा रहा है। शंकराचार्य ने 'विवेकचूड़ामणि' में…
फ़िरदौसी और उसका शाहनामा
यदि शाहनामा न लिखा गया होता तो फ़ारसी भाषा अपनी ८०% शब्द संपदा और सौ प्रतिशत प्राचीन इतिहास को खो बैठतीं । रुस्तम सोहराब का कोई नाम भी न जानता होता ।