बाबा तुलसीदास और प्रायश्चित में गरुड़ संवाद : अधम जाति मैं विद्या पाये /भयउँ जथा अहि…
इसमें क्या ग़लत है ? जातिप्रथा तो थी ही उस समाज में लेकिन ब्राह्मण गुरु ने शूद्र को न केवल शिष्य के रूप में अपनाया उसे विद्या प्रदान की उसके कल्याण के लिए भगवान शिव से कातरता पूर्ण प्रार्थना…