
अजित डोभाल – आतंक के विरुद्ध महायुद्ध का एक महानायक
-सतीश चंद्र मिश्रा की कलम से-

Positive India: Ajit Doval:
आतंक के विरुद्ध महायुद्ध का यदि एक महानायक चुनना हो तो केवल एक नाम निर्विवाद रूप से उभरता है, जिनका नाम है अजित डोभाल… केवल इस नाम मात्र से ही पूरा पाकिस्तान तिलमिलाता भी है और थर्राता भी है। अतः पाकिस्तान ने अजित डोभाल पर भारत के ही गद्दारों जयचंदों से हमला कराने की ठानी। पाकिस्तान ने कमान थमायी एक राष्ट्रवादी नकाब में छुपे रिटायर्ड IAS को। परिणामस्वरूप उस धूर्त ने जाति के हथियार से पीएम मोदी पर अपने हमलों की शुरुआत की और फिर अपने हमलों का मुंह मोड़ दिया अजित डोभाल की तरफ। उनको असफल निकम्मा बताकर उनका इस्तीफा मांगने लगा। लेकिन इस रिटायर्ड IAS की भयंकर पाकिस्तानी साज़िश भांप ली भारत की एक बेटी, वास्तविक Gen G ने और उसकी खाल खींच ली।
पाकिस्तान की परेशानी का कारण बनी, अजित डोभाल जी की उपलब्धियों की संक्षिप्त झलक भी नीचे देखिए और पढ़ें।
2009-2019 के बीच कश्मीर घाटी में कुल लगभग 13,000 से अधिक पत्थरबाजी की घटनाएँ हुईं। इनमें करीब 350 लोग मारे गये। लेकिन 2019 के बाद पिछले 5 साल से पत्थरबाजी की एक भी घटना नहीं हुई। अतः किसी की मृत्यु का कोई प्रश्न ही नहीं।
इसी प्रकार कश्मीर और पूर्वोत्तर में आतंकी घटनाओं तथा उनमें होने वाली मौतों में तीन गुना कमी हुई है।
2004 से 2014 तक, लगभग 10 साल में कश्मीर और पूर्वोत्तर को छोड़कर शेष पूरे देश में लगभग 500 से अधिक आतंकी घटनाओं में लगभग 1500 से अधिक लोगों की जान गई थी।
लेकिन उसी कश्मीर और पूर्वोत्तर को छोड़कर शेष पूरे देश में 2014 के बाद से अबतक केवल 6 आतंकी घटनाएं हुई हैं जिनमें 22 मौतें हुई हैं। यानि 2004 से 2014 तक देश में लगभग 90 गुना अधिक आतंकी घटनाएं हो रहीं थीं और 70 गुना अधिक जानें जा रहीं थी।
2004 से 2014 तक नक्सल आतंक का शिकार बन के सुरक्षा बलों के जवान तथा निर्दोष नागरिकों की 6617 मौत हुई। जबकि 2014 से 2026 तक 12 साल में नक्सल आतंक का शिकार बन के सुरक्षा बलों के जवान तथा निर्दोष नागरिकों की कुल 2500 मौत हुई।
आतंक पर इस महाविजय की नायक पूरी सरकार है जिसके कप्तान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं।
लेकिन आतंक से इस महायुद्ध का यदि एक महानायक चुनना हो तो केवल एक नाम निर्विवाद रूप से उभरता है, जिनका नाम है अजित डोभाल…