
शस्त्र पूजा में AK-47 चलाने वाली IPS अंकिता शर्मा को छत्तीसगढ़ सरकार ने नोटिस थमाया।
-पुरुषोत्तम मिश्रा की कलम से-

Positive India: Purshottam Mishra
छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव सरकार ने ईमानदार आईपीएस अफसर अंकिता शर्मा पर गिराई गाज.
संघर्षशील आईपीएस अंकिता शर्मा, जिन्होंने नक्सल उन्मूलन में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई,उनका महज एक वायरल वीडियो पर छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव सरकार ने नोटिस थमा दिया।
दशहरा पर्व पर छत्तीसगढ़ की आईपीएस अधिकारी अंकिता शर्मा का शस्त्र पूजा के दौरान साड़ी पहनकर AK-47 चलाते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ , इसके बाद कुछ लोगों के पेट में आंकठ दर्द चालू हो गया। अपने दर्द की शांति हेतु यह सभी आलोचक उनकी आलोचना करने में जुट गए हैं। थोड़ी सी आलोचना से विष्णुदेव साय सरकार घबरा गई । घबराहट में सरकार ने अंकित शर्मा के कर्तव्य, कार्यक्षेत्र और सेवाभाव को दरकिनार कर दिया।
यह वही आईपीएस अंकिता शर्मा है जिन्होंने बस्तर के नक्सल प्रभावित इलाकों में नक्सल उन्मूलन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई, जहां चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम करना उनके कर्तव्य का हिस्सा था। दरभा, कोलेंग और तोंगपाल जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस और सुरक्षा बलों के साथ सर्च ऑपरेशन में उनकी भागीदारी का उल्लेख मीडिया रिपोर्टों में मिलता है।
छत्तीसगढ़ी बेटी अंकिता शर्मा ने पुलिस सेवा में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। उन्होंने अपनी ईमानदार छवि से लोगों के बीच एक अमिट छाप छोड़ी है।
बस्तर जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में पुलिस सेवा की जिम्मेदारियां कितनी कठिन हो सकती हैं, इसे समझने के लिए वहां की परिस्थितियों को जानना जरूरी है। यह वही बस्तर है जहां पर पुलिस की पोस्टिंग एक पनिशमेंट मानी जाती रही है , लोग वहां जाने से घबराते थे। उसे परिस्थितियों में आईपीएस अंकित शर्मा ने अपनी ड्यूटी बखूबी निभाई।
छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार ने अंकिता शर्मा की सभी खूबियों को भूलकर सिर्फ यह याद रखा कि अंकिता शर्मा ने साड़ी में एक-47 क्यों चलाई और उसके लिए उनको नोटिस इशू कर दिया।
विजयादशमी पर शस्त्र पूजा करना हमारी परंपरा का हिस्सा है और रहेगा और हथियारों के प्रति सम्मान व्यक्त करना अपने आप में गलत नहीं है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सुप्रीमो मोहन भागवत भी नागपुर में आरएसएस के हेड क्वार्टर पर बाकायदा शस्त्र पूजा करते हैं।
छत्तीसगढ़ की सरकार ने महज कुछ लोगों की आलोचना पर अंकिता शर्मा की संघर्षशील ड्यूटी, उनकी ईमानदारी और उनके साहस को सिरे से नकारते हुए नोटिस इशू कर दिया और उनके पूरे व्यक्तित्व और कार्यों को नजरअंदाज कर दिया!!
एक रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल ने थोड़ी सी आलोचना क्या कर दी , थोड़ा सा सवाल क्या उठा दिया,छत्तीसगढ़ की संपूर्ण सरकार प्रेशर में आ गई। आलोचना का अधिकार सभी को है, लेकिन आलोचना निष्पक्ष और जिम्मेदार भी होनी चाहिए।
आईपीएस अंकिता शर्मा के वर्षों के कार्य, साहस और कर्तव्यनिष्ठा का मूल्यांकन करना तो दूर, कुछ सेकंड में सरकार ने उस पर पानी फेर दिया । क्यों और किसके दबाव में?
अहम सवाल यह है कि छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार किसी भी अधिकारी का ईमानदारी से मूल्यांकन करेगी या सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो देखकर फैसला सुना देगी?