

Positive India: Dayanand Pandey:
वह कौन कृतघ्न और घृणित लोग हैं जिन्हों ने स्मित मच्छार के साहस और शौर्य को सैल्यूट नहीं किया । सैल्यूट ? अरे इस घटना की नोटिस तक नहीं ली । सिर्फ़ इस लिए कि हमलावर को-पायलट मुस्लिम जेहादी था । किसी मुस्लिम संगठन , ओवैसी आदि तो छोड़िए, कांग्रेस , सपा जैसी सभी सेक्यूलर सूरमा पार्टियां भी इस बाबत कब्रिस्तान जैसी ख़ामोशी अख़्तियार किए बैठी हैं ।
ऐसे जैसे कुछ घटा ही न हो । और तो और कुछ श्वान तो स्मित मच्छार की मजम्मत में भी उपस्थित हो गए हैं । पूछ रहे हैं कि नेतन्याहू को कैसे यह सब पता चल गया ? और तो और मोदी ने बिना सोचे समझे कैसे नेतन्याहू को आँख बंद कर फालो कर लिया ? अजब-ग़ज़ब सवाल हैं इन श्वानों के ।
स्मित मच्छार का दोष सिर्फ़ इतना है कि एक तो वह हिंदू है , तिस पर ब्राह्मण । गुजराती भी । हनुमान चालीसा पढ़ने की बात बताई है उस कठिन घड़ी में , स्मित मच्छार ने । हनुमान चालीसा की ताक़त का बखान किया है स्मित ने । भगवत गीता की बात की । यह सब कहां बर्दाश्त होगा इन अभागों को । फिर ओमान के उस जेहादी को-पायलट के प्लान को क्यों नाकाम कर दिया । कुतर्क की कुत्तागिरी की कोई हद नहीं है । स्मित मच्छार ने अपनी जान पर खेल कर कैसे इतने सारे लोगों को बचा लिया , सारे भौंकते हुए सवाल इसी पर है । या फिर ख़ामोशी !
अल्ला हो अकबर ! का नारा उस ओमान के जेहादी को-पायलट ने ही नहीं , यह सारे कृतघ्न और घृणित लोग भी लगा रहे हैं । बस शब्द बदल गए हैं । भाव और जेहाद वही हैं ।
साभार:दयानंद पांडेय-(में लेखक के अपने विचार हैं)