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आप मोदी को पसंद करें या नापसंद पर उन्होंने भ्रष्ट जातिवादी और पारिवारिक राजनीति पर पूर्ण विराम तो लगा ही दिया है

-दयानंद पांडेय की कलम से-

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Positive India:Dayanand Pandey:
आप नरेंद्र मोदी को पसंद करें या नापसंद यह आप की अपनी सुविधा है। लेकिन इस आदमी ने यह एक काम तो कर ही दिया है कि भ्रष्ट और जातिवादी , पारिवारिक राजनीति पर पूर्ण विराम तो लगा ही दिया है । पहले दिल्ली की केंद्रीय राजनीति से नेहरु गांधी परिवार और अब महाराष्ट्र से पवार और ठाकरे परिवार और हरियाणा की राजनीति से चौटाला , भजनलाल परिवार की विदाई के साथ ही अब यह परिवार , जाति , भ्रष्टाचार और छत्रप राजनीति का संभावित अवसान उत्साहजनक है । अब आप सांप्रदायिक, सेक्यूलर जैसे भारी भरकम लफ्फाज़ी वाले अल्फाज़ों से अभी भी घिरे हुए हैं , वैचारिक हठ के दुराग्रह में अभी भी फंसे पड़े हैं तो मित्रों आप को आप का यह आग्रह मुबारक !

अगर यह सब इतना ही प्रिय था तो क्यों जातिवादी , पारिवारिक भ्रष्टाचारी राजनीति पर आप का यह हठ अब तक मुंह सिला हुआ था? समय रहते क्यों नहीं खुला ? तब अगर यह सारे मसले आप का मुंह सिले हुए थे और आप एक सेक्यूलर शब्द के झुनझुने की आड़ में इस जाति, परिवार और भ्रष्टाचार , कदाचार आदि सब को ‘ कवर ‘ किए हुए थे, इतना कि सेक्यूलर शब्द अपना राजनीतिक-सामाजिक अर्थ भी धूमिल कर बैठा । लेकिन जनता-जनार्दन तो जनता-जनार्दन ही ठहरी ! वह क्लीयर बात जानती है , और ऐसे कदाचारियों को क्लीयर करना भी !

ध्यान रहे देश में पिछड़े ,दलित और मुस्लिम अस्सी प्रतिशत से अधिक हैं । तो इस बात को ब्राह्मणवादी और भाजपाई या मोदी भक्त बता कर शुतुरमुर्गी अदा दिखा कर मुंह बिचकाने की गुंजाइश भी बहुत है नहीं । इस विकल्प को चुनने में सवर्णों से ज़्यादा इन दलित , पिछड़ों और मुस्लिम मतदाताओं की ही भूमिका है । बाक़ी तो आप मित्रों की लफ्फाज़ी के लहज़े में बहुत कुछ और भी है पर सच को सच कहने और स्वीकार करने का साहस अनुपस्थित है यह तो मैं जानता ही हूं ।
साभार:दयानंद पांडेय-(ये लेखक के अपने विचार हैं )

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